फिल्म मिशनमंगल के निर्देशक जगन शक्ति से नवदुनिया की बातचीत

भोपाल।नवदुनिया रिपोर्टर

हाल ही में आई फिल्म मिशन मंगल अपने अलग तरह के विषय और कंटेंट के कारण दर्शकों के बीच चर्चा का विषय रही। इस फिल्म को न सिर्फ दर्शकों ने सराहा, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर सफलता भी पाई। इस फिल्म के निर्देशक जगन शक्ति ने बुधवार को शहर में उपस्थित थे। वे पब्लिक रिलेशन सोसायटी की ओर से आयोजित विज्ञान फिल्म निर्माण कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। इस मौके पर उन्होंने नवदुनिया लाइव से चर्चा में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मैं फिल्म की तैयारी के लिए इसरो इस सोच के साथ पहुंचा था कि शायद वैज्ञानिक सपोर्ट नहीं करेंगे। लेकिन चेयरमैन के.सिवन ने मुझे समय निकाल कर मंगलयान मिशन से जुड़े हर एक व्यक्ति से मिलाया। साइंटिस्ट से मुलाकात की, जिन्हें देखकर लगा कि वाकई में यह लोग काफी सिंपल हैं, सिंपल सी शर्ट पैंट, कॉटन और सिंपल सी साड़ियों में काम करने वाले यह साइंटिस्ट वाकई देश के लिए बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। सिम्पलीसिटी और जीनियस माइंड एक 'डेडली कॉम्बीनेशन' है। फिल्म के लिए वे हमें लोकेशन नहीं दे पाए। इसके लिए सेटअप हमने ही तैयार किया था। वैज्ञानिक भी चाहते हैं कि जनता के बीच 'इसरो' से संबंधित जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 मिशन के दौरान भारतीयों की जितनी जिज्ञासा थी उतनी इतिहास में कभी नहीं रही।

मनोरंजन ने टेक्निकल चीजों को आसान किया

मुझे हमारी स्टार कास्ट ने फर्स्ट टाइम डायरेक्टर की तरह ट्रीट नहीं किया। मैंने कभी नहीं देखा की हमारी कास्ट में किसी तरह की कोई प्रोब्लम हो रही है। एक मिथ है कि दो हीरोइन एक साथ काम नहीं कर सकती पर ऐसा मेरे साथ नहीं हुआ। हमारी स्क्रिप्ट के अनुसार ही सारे सीन शूट हुए हैं। हमारा पहला चैलेंज था कि यह फिल्म साइंस डॉक्यूमेंट्री न बन जाए। अक्षय कुमार जैसे सुपरस्टार के साथ काम कर रहे हैं, चांस मिला है कि दूर-दूर तक पहुंच मिल सके। हमने मनोरंजन के जरिए फिल्म की टेक्निकल चीजों को आसान किया। हमने फिल्म के लिए छह महीने से ज्यादा रिसर्च वर्क किया, जिसके बाद देखा कि कैसे अब इसे आसान तरीके से प्रस्तुत किया जाए। इसमें बहुत बड़ा योगदान आर.बाल्की सर का भी रहा। आजकल बच्चे कह रहे हैं कि उन्हें एस्ट्रोनॉट बनना है, तो यह हमारी फिल्म की सफलता बताता है।

ऑटोवाले को देखकर आया आइडिया

फिल्म की तैयारियों के दौरान हम बैंगलुरु में एयरपोर्ट से लौट रहे थे। तो देखा कि एक ऑटो वाले का पेट्रोल खत्म हो गया है। दूसरा ऑटो वाला दोस्त पीछे से एक पैर लगा कर धक्का दे कर पेट्रोल पंप तक ले जाता है। हमने यहां से आइडिया लिया कि साइंस और टेक्निकल कंटेंट से भरी फिल्म को कैसे आसान किया जाए। इसी प्रकार फिल्म के एक्टर्स ने भी खुद को तैयार किया। सीन के अनुसार हमने एक डॉक्यू टे्रनिंग और वर्कशॉप दी। अक्षय कुमार ने पांच से छह माह तक सिर्फ स्क्रिप्ट की स्टडी की। फिर 36 दिनों में मिशन मंगल बनकर तैयार हो गई।

हमारे वैज्ञानिक भी करते हैं ईश्वर में विश्वास

जगन का कहना है कि अभी जब मिशन चंद्रयान- 2 में कुछ प्रतिशत असफल होने पर इसरो के चेयरमैन की आंखों से आंसू आए तो लगा कि यह लोग भी अपने काम में भगवान को याद करते हैं। सैटेलाइट पर लांचिंग से पहले टीका लगाना, मंदिर जाना, प्रार्थना करना दिखाता है कि विज्ञान भी चमत्कार में विश्वास करती है। यह हमारे देश में होता है और कहीं नहीं हो सकता। क्योंकि हम अपनी संस्कृति के साथ चलते हैं। उन्होंने बताया कि अब अक्षय कुमार के साथ साउथ की रीमेक फिल्म इक्का बनाने की तैयारी चल रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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