जनजातीय संग्रहालय में व्याख्यान एवं कथक प्रस्तुति

भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित गमक श्रृंखला अंतर्गत सोमवार शाम को उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा डॉ. मयूरा पंडित खटावकर, भोपाल द्वारा व्याख्यान एवं कथक नृत्य की प्रस्तुति दी गई।

शुरुआत में डॉ. मयूरा ने अपने व्याख्यान कहा कि कथक का जन्म कथा कहने से हुआ है, कथा कहने वाले मंदिरों में ईश्वर की गाथाओं को गाकर सुनाते थे, धीरे- धीरे उसमें वाद्य यंत्रों का समावेश होने लगा और वह प्रक्षकों को अधिक आकर्षित करने लगा, फिर धीरे-धीरे उसमें नृत्य का समावेश हुआ और वहीं से कथक की उत्पत्ति हुई। रायगढ़ शैली की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें ताल और भाव पक्ष दोनों को सामान महत्व दिया जाता है। डॉ. मयूरा ने नृत्य की शुरुआत आदि जगत जननी शक्ति स्वरुप मां दुर्गा की स्तुति से की। इसके बाद वरिष्ठ गुरु पंडित रामलाल द्वारा कोरियोग्राफ की हुई रायगढ़ शैली में त्रिताल शुद्घ कथक की प्रस्तुति दी। सांवरे आजैयो- एक गोपिका का कृष्ण के प्रति प्रेम समर्पण भाव तथा तराना और ठुमरी- अभिसारिका नायिका से अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। डॉ. मयूरा ने रायगढ़ घराने के नृत्य गुरु पंडित रामलालजी से आठ वर्ष की आयु से कथक नृत्य की शिक्षा लेना आरंभ कर दिया था। आपने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से कथक में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में मुंबई में छात्रों को कथक की शिक्षा दे रही हैं।

गमक में आज

मंगलवार को दोपहर 12ः30 बजे सुश्री मालिनी अवस्थी, लखनऊ का लोक परंपरा में स्त्री सर्जनात्मकता एकाग्र उद्बोधन एवं शाम 6ः30 बजे से सुश्री अवस्थी की गायन प्रस्तुति होगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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