भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी 27 नवंबर शनिवार को काल भैरव जंयती के रूप में मनाई जाएगी। पंडित रामजीवन दुबे ने बताया कि इस दिन काल भैरव भगवान का अवतरण हुआ था। काल भैरव को भगवान शिव का रूद्र रुप बताया गया है। मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष अष्टमी पद्मक योग में मनाई जाएगी। शुभ मुहूर्त सुबह 5:43 बजे से लेकर मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष अष्टमी का समापन 28 नवंबर रविवार को सुबह छह बजे होगा। उन्होंने बताया कि भगवान काल भैरव को दंडापणि कहा जाता है। काल भैरव दयालु, कल्याण करने वाले और अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले देव कहे जाते हैं। इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से जीवन की बाधाओं और परेशानियों से छुटकारा मिलता है। साथ ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भगवान कालभैरव की पूजा करने से भक्तों में अपने सभी शनि और राहु दोषों का निवारण होता है।

राजधानी में स्‍थित श्री काल भैरव मठ में शुक्रवार को यानी श्री काल भैरव अष्टमी महोत्सव का शुभारंभ होगा। शाम पांच बजे श्री काल भैरव नाथ की शाही सवारी निकाली जाएगी। श्री काल भैरव नाथ का श्रृंगार, महाआरती, रात्रि जागरण होगा। 28 नवंबर को हवन एवं संत समागम की ध्वजा स्थापना के बाद भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

उदया तिथि में चार दिसंबर को मनेगी शनिश्चरी अमावस्या

इस साल के आखिरी महीने में चार दिसंबर को शनिश्चरी अमावस्या का विशेष योग बन रहा है। अमावस्या तिथि का प्रारंभ तीन दिसंबर को दोपहर 4:55 बजे से हो जाएगा। यह तिथि शनिवार को दोपहर 1:12 बजे तक रहेगी। शनिवार के दिन उदया तिथि एवं कुतप बेला में अमावस्या तिथि शनिवार के दिन होने के कारण देव एवं पितृ कार्य शनिश्चरी अमावस्या चार दिसंबर को मनाई जाएगी। जिन जातकों की राशि में शनि की ढईया या शनि की साढ़े साती चल रही है या अकारक होकर शनि की महादशा या अंतर्दशा चल रही है, उनके लिए शनिश्चरी अमावस्या के दिन दशरथकृत शनि स्त्रोत का पाठ, शनि गृह के तांत्रिक बीज मंत्र का जाप, अपाहिज भिखारी को दान, केशदान, तुलादान करना विशेष शुभ माना जाता है।

Posted By: Ravindra Soni

NaiDunia Local
NaiDunia Local