भोपाल (राज्य ब्यूरो)। पंचायत और नगरीय निकाय के चुनाव मिशन 2023 की दिशा तय करेंगे। विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है। हम जैसा बीज बोएंगे, वैसी ही फसल तैयार होगी। इन चुनावों को पूरी गंभीरता से लें और विधायक पूरी ताकत से जुट जाएं। इसकी जीत ही अगली सरकार की बुनियाद रखेगी। भाजपा की सोच ओबीसी और आदिवासी विरोधी है। ओबीसी के साथ भाजपा सरकार ने छलावा किया है। हमने 27 प्रतिशत आरक्षण दिया था लेकिन सरकार की गलती की वजह से यह घट गया। अब कहीं, पांच, सात और दस प्रतिशत ही आरक्षण मिलेगा। यह बात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने शनिवार को अपने आवास पर आयोजित विधायक दल की बैठक में कही।

बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा, राजमणि पटेल, नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। कमल नाथ ने कहा कि आज माहौल कांग्रेस के पक्ष में है। हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ना है। प्रदेश में लगातार आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे हैं। सांप्रदायिक सदभाव को बिगाड़ने की घटनाएं हो चुकी हैं। डा.सिंह ने कहा कि हमारा लक्ष्य रहेगा कि विधानसभा का सत्र ज्यादा से ज्यादा दिन चले ताकि सरकार की असफलताओं को उजागर किया जा सके। उन्होंने विधायकों से कहा कि सरकार के घपले-घोटालों को आगामी सत्र में उठाएं। बैठक में बताया कि डा.राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में वचन पत्र और अजय सिंह की अध्यक्षता में आरोप पत्र समिति गठित की है।

विधायकों को सौंपी नगरीय निकायों की जिम्मेदारी : पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने नगरीय निकायों के चुनाव की जिम्मेदारी विधायकों को सौंपी है। बैठक में कहा गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आने वाले निकायों में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए जुट जाएं। प्रत्याशी का चयन सहमति बनाकर किया जाए और इसमें सतर्कता बरती जाए। पंचायत चुनाव के लिए पर्यवेक्षक भी नियुक्त कर दिए हैं, जो मैदानी स्थिति का आकलन करके रिपोर्ट देंगे।

डा.गोविंद सिंह का किया स्वागत : नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह का बैठक में स्वागत किया गया। कमल नाथ ने कहा कि डा.सिंह विधायकों में सबसे वरिष्ठ हैं, इसलिए उन्हें यह दायित्व मिला है।

आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देगी कांग्रेस

बैठक में बताया गया कि पार्टी ने तय किया है कि आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 2018 में कांग्रेस की 15 साल बाद सत्ता में वापसी में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मुख्यमंत्री रहते कमल नाथ ने आदिवासी वर्ग के लिए योजनाएं भी प्रारंभ की थीं। विधायक दल की बैठक से पहले उन्होंने अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के विधायकों के साथ अलग से बैठक की।

Posted By: Prashant Pandey

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