भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने खजुराहो विश्व धरोहर श्रृंखला के तहत मध्यप्रदेश हस्तशिल्प विकास निगम के बुनकरों द्वारा खजुराहो के मंदिरों पर आधारित साड़ी का सोमवार को राजभवन में दीदार किया। इस अवसर पर हस्तशिल्प विकास निगम के प्रबंध संचालक राजीव शर्मा एवं महाप्रबंधक महेश गुलाटी उपस्थित थे। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने बुनकरों द्वारा साड़ी पर निर्मित कंदरिया महादेव मंदिर की सराहना करते हुए कहा कि यह शिल्पकला का अद्भूत नमूना और कारीगरों के परिश्रम का सुफल है।

इस अवसर पर राज्यपाल को जानकारी देते हुए बताया गया कि चंदेरी और महेश्वर के बुनकरों ने खजुराहो के मंदिरों को साड़ियों पर उकेरा है। हस्तशिल्प विकास निगम की आगामी योजना महेश्वर के घाट और ग्वालियर के किले पर आधारित वस्त्र श्रृंखला तैयार करने की है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सांची और भीमबेटिका पर आधारित साड़ियां भी बनाई जा चुकी हैं। सांची अंगौछा भी मार्केट में उतारा गया है। इस अवसर पर राज्यपाल श्रीमती पटेल को हस्तशिल्प विकास निगम के अधिकारियों ने अंगवस्त्र भेंट किया, जिसमें बुनकरों द्वारा सांची का बौद्ध स्तूप निर्मित किया गया है।

सिक्के जैसे जरी वर्क के कारण नाम पड़ा डॉलर साड़ी

वसंत ऋतु में आगामी विवाह समारोह और पारिवारिक आयोजनों आदि के अनुकूल सिल्क साड़ियों की व्यापक श्रंखला एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए कम्युनिटी हॉल, बिट्टन मार्केट में सिल्क इंडिया प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। 28 फरवरी तक चलने वाली प्रदर्शनी में देशभर के बुनकर अपनी कला का बेहतरीन नमूना लेकर उपस्थित हुए हैं। यहां मस्लीन सिल्क की बनी हुई डॉलर साड़ी सबसे खास है। यह साड़ी पहनने में काफी हल्की होती है। इसमें एंडिंग प्लेट से लेकर राउंड एंड शोल्डर मशलीन सिल्क से और डाउन साइड मटका सिल्क से बुना गया है। इस साड़ी में गोल सिक्के जैसे जरी के बूटे बने रहते हैं, जिससे इसे डॉलर साड़ी नाम दिया गया है। इस साड़ी की कीमत साढ़े दस हजार रुपए है। बेंगलुरु से आए बुनकर सोमेन कर्मकार जो कि पेशे से टेक्सटाइल डिजाइनर हैं, इस प्रदर्शनी में कांजीवरम, धर्मावरम, मैसूर सिल्क, शिफॉन प्योर गोल्ड पॉलिस, सिल्वर जरी साड़ियां लेकर आए हैं। जिनकी कीमत पांच हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपए है। कांजीवरम की यह साड़ियां रीसेल की जा सकती हैं। कोई भी कांजीवरम दुकानदार इनको 40 प्रतिशत में वापस खरीद लेता है। वहीं कोलकाता से आए बुनकर सुमन औरगेंजा, टिशू ,बालूचरी लिनेन, ढाकाई जामदानी, नायल सिल्क, कांथा वर्क, मटका सिल्क साड़ियों का कलेक्शन प्रदर्शित कर रहे हैं। मटका जामदानी प्योर सिल्क साड़ी दो बुनकर मिलकर तीन महीने में बनाते हैं। यह बेहद हल्‍की पार्टीवियर साड़ी है, जिसका मेंटेनेंस जीरो है।

Posted By: Ravindra Soni

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