Karwa Chauth 2021: हमारा देश विविधता में एकता का प्रतीक है। अलग भाषा, अलग भेष, अलग तरीके फिर भी मूल में एकता है। हमारे देश में लोगों में धार्मिक आस्था और विश्वास के लिए त्याग और समर्पण का भाव भी बहुत गहराई से देखने को मिलता है। इस त्याग और समर्पण में प्रकृति के साथ प्रेम व समन्वय भी बहुत गहरा होता है। यही वजह है कि हमारे यहां भगवान सूर्य, चंद्र, जल, वनस्पति, अग्नि वायु की पूजा की जाती है। सनातन काल से चली आ रही वैदिक परंपराओं में देव दर्शन, व्रत और तीर्थ स्थान का भी बड़ा महत्व है। इसी परंपरा में हमारे देश में कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत मनाया जाता है। इस दिन हम सभी बहनें दिनभर बिना आहार और बिना जल के व्रत रखकर रात में चंद्र देवता के दर्शन करती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए मानव कल्याण के लिए प्रार्थना करती हैं। मैंने अपना करवा चौथ का पहला व्रत भिलाई में किया था। जब मेरे पतिदेव सांसद थे और भिलाई में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक थी। मेरे पतिदेव ने सदैव पार्टी के कार्यों को प्राथमिकता दी है। साथ ही भारतीय संस्कृति की परम्पराओं में भी उनकी गहरी आस्था है।

पार्टी की बैठक और करवा चौथ की तिथि एक ही दिन होने के कारण उन्होंने मुझसे कहा कि तुम भी मेरे साथ भिलाई चलो इस प्रकार पार्टी की बैठक के साथ ही हमने करवा चौथ भिलाई में ही मनाया। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूं कि अपनी अत्यधिक राजनीतिक व्यस्तता के बावजूद कोई भी करवा चौथ ऐसी नहीं हुई, जिसमें मेरे पति मेरे साथ ना रहे हों, करवा चौथ के दिन उन्होंने थोड़ा समय मुझे अवश्य दिया। मुझे एक और अवसर याद आ रहा है जब पतिदेव को पार्टी की किसी बैठक के लिए दिल्ली से ट्रेन से यात्रा करनी थी। उसी दिन करवा चौथ थी। मैं भी उनके साथ ट्रेन में थी। हम घर से ही खाना लेकर गए, हमने ट्रेन में ही मोमबत्ती जलाकर खिड़की से चन्द्रमा की आरती उतारी और अर्घ्य दिया और पतिदेव को सिंदूर वाली स्टिक से तिलक किया। उसी ट्रेन में हमारे साथ में श्रद्धेय सुंदरलाल पटवा यात्रा कर रहे थे और हम दोनों को ऐसा करते देख मुस्कुरा रहे थे। जब अर्घ्य देकर हम दोनों ने उनके पैर छुए तो उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप हमें सौ स्र्पये दिए और कहा कि तू इसलिए शिवराज के साथ यात्रा कर रही है। इस तरह से मैंने कई अलग-अलग तरह से करवा चौथ मनाया।

एक राजनेता की पत्नी होने के नाते हमेशा पतिदेव की व्यस्तता के कारण उनके साथ तालमेल बैठाना होता है। मुझे खुशी है कि वे अपनी सारी भागदौड़ के बीच, पूजा के लिए समय अवश्य समय देते हैं। करवा चौथ की कहानी भी पढ़कर सुनाते हैं। करवा चौथ मनाने की हमारी वर्षों से यही परंपरा चली आ रही है। मैं ईश्वर से कामना करती हूं कि सभी को ऐसे पति मिले जो अपनी पत्नी की भावनाओं का सम्मान करें। करवा चौथ एक ऐसा त्योहार है जो शहर या ग्रामीण सभी जगह मनाया जाता है।

कई बहनें ऐसी हैं जिनके पति देश की रक्षा के लिए सीमा पर अपनी सेवा दे रहे हैं, वह भी अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत करती हैं और घर पर ही पति का फोटो देखकर अपना व्रत खोलती हैं। मुझे ऐसी बहनों पर गर्व महसूस होता है कि वह ऐसा करके देश सेवा करने के लिए अपने पति का मनोबल बढ़ाती हैं। इस वर्ष करवा चौथ रविवार को है, इस कारण यह व्रत चंद्र देवता के साथ-साथ सूर्यदेव को भी समर्पित होगा। हमारी संस्कृति में भगवान सूर्य तेज के प्रतीक हैं और चंद्रमा शीतलता के। इस वर्ष करवा चौथ रोहिणी नक्षत्र में पड़ रहा है, जो आरोग्य और दीर्घ आयु का फल देने वाला है। इसलिए इस बार का व्रत हमारी बहनों को विशेष लाभ देने वाला है। मैं अपनी बहनों को करवा चौथ की शुभकामनाएं देती हूं। ईश्वर उनके जीवन में खुशियां और समृद्धि लेकर आएं। - साधना सिंह

Posted By: Prashant Pandey

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