Khelo India Youth Games MP : भोपाल। मध्यप्रदेश में "खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2022" का रोमांच 31 जनवरी से 11 फ़रवरी तक देखने को मिलेगा। मप्र के आठ शहर भोपाल, इंदौर , जबलपुर , ग्वालियर , उज्जैन ,बालाघाट, मंडला और महेश्‍वर ( खरगौन) में आयोजित होंगे। इसकी तैयारियां जोरो पर हैं। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स के 5वें संस्करण के सफल आयोजन में सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा, इसमें वालेंटियर्स की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। हमने ये निर्णय लिया है कि प्रदेश के समस्त 8 जिले जहाँ पर खेलो इंडिया गेम्स के इवेंट निर्धारित हैं, इस सभी जगह 18-25 आयु वर्ष के लगभग 2000 विद्यार्थी वालेंटियर्स के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। इसके लिए 30 नबंवर तक रेजिस्ट्रेशन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। 1 से 5 दिसंबर के मध्य विद्यार्थियों का संबंधित रजिस्ट्रार/ प्राचार्य द्वारा सत्यापन किया जायेगा। वालेंटियर्स का रेजिस्ट्रेशन my gov पोर्टल पर गूगल फॉर्म के माध्यम से https://mp.mygov.in/group_issue/khelo_india_youth_games_50_volunteer_registration/ लिंक से कराया जा सकता है। इस संदर्भ में उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से संबंधित जिलों के विश्विद्यालय के रजिस्ट्रार एवं शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य , एनएसएस, एनसीसी के प्राध्यापक एवं स्पोर्ट्स ऑफिसर्स के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की गई।

महाविद्यालयीन विद्यार्थी बनेंगे वॉलेंटियर, बहु-भाषी विद्यार्थियों को प्राथमिकता

खेलो इंडिया में‍ विभिन्न राज्यों के लगभग 6 हजार से ज्यादा खिलाड़ी भाग ले रहे है। विभिन्न प्रांतों से आए इन खिलाड़ियों की सुविधा के लिए उच्च शिक्षा विभाग बहु-भाषी विद्यार्थियों को वॉलेंटियर के लिए प्राथमिकता देगा। खेलों इंडिया गेम्स की ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया के बाद 1 से 5 दिसम्बर तक महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर पर पंजीकृत विद्यार्थियों के सत्यापन और चयन की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। 15 दिसम्बर से इन चयनित वालिंटियर्स को विशेषज्ञों द्वारा एक सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जायेगा। चयनित वॉलेंटियर्स खेल आयोजन के दौरान जिलों में निर्धारित स्थान पर सुबह 7 से शाम 7 बजे तक उपस्थित रहेंगे।

आयोजन की जान होते है वालेंटियर

किसी भी बड़े आयोजन की जान होते है वालेंटियर, आयोजन स्‍थल पर हर छोटी बड़ी व्‍यवस्‍था में इनका अहम योगदान होता है। अधिकांश खिलाड़ी बाहर से आते है, यह उनके साथ रहकर उनकी मदद करते है। एक प्रकार से मददगार साबित होते है। स्‍कूल व कालेज के छात्रों में वालेंटियर बनने का बड़ा क्रेज रहता है, बडे आयोजन में सहयोग और खिलाडि़यों से साथ बिताया समय इनके लिए यादगार बन जाता है, भविष्‍य में कई वालेंटियर बड़े खिलाड़ी भी बन जातेे है।

Posted By: Lalit Katariya

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