भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि, Doctor's Advice। कोरोना काल में हर व्यक्ति भरोसे के साथ आयुर्वेदिक काढ़ा पी रहा है। इससे काफी फायदा भी लोगों को हुआ है। कारोना से संक्रमित होने के बाद लोग जल्दी स्वस्थ भी हुए हैं, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि तय विधि के अनुसार ही काढ़ा बनाएं और इस्तेमाल करें। त्रिकटु काढ़ा सोंठ, काली मिर्च और पीपल से बनाया जाता है। कई लोग काढ़ा को काफी देर तब उबालने के बाद पीते हैं, लेकिन इसमें इन चीजों के तत्व खत्म हो जाते हैं। चाय की तरह काढ़ा सिर्फ इतनी देर के लिए उबालें कि सभी तत्वों का निचोड़ पानी में आ जाए। इसके बाद छानकर इसे पी लें। यदि त्रिकटु काढ़ा में तुलसी की पत्ती अलग से डाल लें तो बेहतर होगा। यह कहना है आयुर्वेद चिकित्‍सा विशेषज्ञ डॉ शशांक झा का, जिन्‍होंने काढ़ा तैयार करने और इसके सेवन को लेकर और भी कई महत्‍वपूर्ण बातें बताईं।

डॉ शशांक के मुताबिक कोई भी मौसम हो, लगातार 15 दिन से ज्यादा काढ़ा नहीं पीना चाहिए। एक हफ्ते इसे छोड़ देना चाहिए। सर्दी-जुकाम और गले में तकलीफ है तो काढ़ा दिन में दो बार नहीं तो एक बार सिर्फ सुबह पीएं। गिलास में तीन चौथाई पानी लेकर उबालें और इसमें एक चम्मच का चौथाई हिस्सा काढ़ा डालें।

आरोग्य कसायम काढ़ा भी इसी तरह से बनाना चाहिए। काढ़ा उपलब्ध न हो तो त्रिकटु काढ़ा में गिलोय, मुलेठी और हरण अलग से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में डाल लें। बुखार होने पर गिलोय का काढ़ा अलग से बना लें। मुलेठी का काढ़ा अलग से बना सकते हैं। इसमें मुलेठी को तब तक उबालें, जब तक पानी आधा रह जाए।

Posted By: Ravindra Soni

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