भोपाल, शशिकांत तिवारी। खाने-पीने का सामान बनाने या बेचने वाला छोटा-मोटा कारोबारी हो या कोई कंपनी, सरकारी हो या निजी, सभी की निगरानी और लाइसेंस लेने की व्यवस्था एक नवंबर यानी आज से सख्त कर दी गई है। अब इन्हें खाद्य लाइसेंस लेने के लिए फूड सेफ्टी एवं स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआइ) को आवेदन करना होगा। एफएसएसएआई सभी दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही जिलों में अभिहित अधिकारी (डीओ) को लाइसेंस देने के लिए कहेगी। आवेदन के महीने भर के भीतर हर हाल में लाइसेंस जारी करना होगा। यह व्यवस्था फूड सेफ्टी कंप्लायंस सिस्टम 'फास्कोस" में की गई है। यह सिस्टम एक नवंबर से लागू हो गया है। एफएसएसएआइ ने निर्माताओं और बिक्रेताओं की 18 श्रेणियां बनाई हैं। मसलन, कचौड़ी की अलग, समोसा की अलग। लाइसेंस लेने के बाद कारोबारी को बताना होगा कि वह कौन-कौन सी चीजों के लिए लाइसेंस लेना चाहता है।

लाइसेंस ही नहीं, इस सिस्टम में निगरानी की व्यवस्था भी अब बेहद सख्त कर दी गई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी संबंधित दुकान का निरीक्षण और सैंपल लेने के बाद एफएसएसआई में उस दुकान के लाइसेंस नंबर के साथ पूरी जानकारी दर्ज करेंगे। दुकान से लिया गया सैंपल फेल होता है, तो यह जानकारी भी दर्ज की जाएगी। किस दुकान से साल भर में कितनी बार सैंपल लिया गया है, सैंपल फेल हुआ या पास, किस खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने सैंपल लिया, ये तमाम जानकारी उस दुकान के लाइसेंस नंबर के जरिए संग्रहीत हो जाएगी। इसी आधार पर उस निर्माता या विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह भी आसानी से पता किया जा सकेगा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी सभी दुकानों से सैंपल ले रहे हैं या नहीं।

मास्साब बताएंगे कि नुकसानदेह है जंक फूड

भोपाल के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अरुणेश पटेल ने बताया कि बड़े निर्माताओं को अपने यहां के एक कर्मचारी को गुणवत्ता के लिए प्रशिक्षित करना होगा। चार से पांच दिन की ट्रेनिंग खाद्य सुरक्षा अधिकारी देंगे। स्कूलों में भी कैंटीन होती हैं। लिहाजा यहां किसी शिक्षक को प्रशिक्षित किया जाएगा। वह बच्चों को बताएंगे कि स्वास्थ्यवर्धक आहार कौन से हैं और नुकसानदेह कौन से। उन्होंने कहा कि 'फास्कोस" से दुकानों की निगरानी बेहतर होगी, जिससे गुणवत्ता में सुधार आएगा।

Posted By: Ravindra Soni

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