लाट साहब : राजधानी की कोलार तहसील के अधिकारियों की इन दिनों जमकर शिकायतें हो रही हैं। इन शिकायतों ने विधानसभा में भी कूच कर दिया है। कोलार तहसील के दो आरआइ के खिलाफ विधानसभा में प्रश्न भी लग चुका है। वहीं यहां पदस्थ एक नायब तहसीलदार की कलेक्ट्रेट से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत हो चुकी है। आलम यह है कि इस तहसील में पदस्थ अधीनस्थ कर्मचारी भी बिना लेन-देन के काम करने से सीधे मना कर देते हैं। विगत दिनों एमपी नगर सर्किल से कोलार में पहुंचे एक रीडर की भी आम जनता शिकायत कर रही है कि बाबू फाइल में 'वजन' बढ़ने पर ही आगे बढ़ाते हैं, अन्यथा फाइल उनके पास ही धूल खाती रहती है। बताया जा रहा है कि इन महाशय के पास तो एक ठंडा बस्ता भी है, जिसमें बिना लेन-देन वाली फाइलें डाल दी गई हैं। इस तरह तहसील का हर कोना भ्रष्टाचार से आबाद है।

नायब तहसीलदारों का टोटा

राजधानी में कोई भी नायब तहसीलदार अपनी पोस्टिंग करवाने से तौबा कर रहा है। यही कारण है कि जिले में नायब तहसीलदारों के स्वीकृत पद तो 15 हैं, लेकिन 10 ही पदस्थ हैं। इस तरह पांच नायब तहसीलदारों का टोटा पिछले तीन सालों से चला आ रहा है। दरअसल, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और राजस्व संबंधी कार्यों के लिए वरिष्ठ आरआइ को नायब तहसीलदार का प्रभार सौंपा गया था। इसके बाद शहर में कानून-व्यवस्था से लेकर हर काम में जिला अव्वल आ रहा था, लेकिन दो साल पहले इन वरिष्ठ आरआइ से नायब तहसीलदार की शक्तियां फिर वापस ले ली गईं। इसके बाद से राजधानी में नायब तहसीलदारों का टोटा सा छा गया। अब यहां कोई नया नायब तहसीलदार आने के लिए भी तैयार नहीं है। इधर, शहर में तहसीलदारों के पद 12 हैं और सभी भरे हुए हैं। वहीं डिप्टी कलेक्टर के 15 पदों में से नौ भरे हुए हैं।

मुखिया को फॉलो कर रहे साहब

राजधानी में एक वरिष्ठ अफसर ऐसे हैं, जो इन दिनों अपनी छवि सुधारने में लगे हुए हैं। इन साहब के स्वभाव में आ रहे इस परिवर्तन का बखान उनके स्टाफ के कर्मचारी भी करने लगे। बताया जा रहा है कि साहब अब जिले के मुखिया को फॉलो करते हुए उनकी अच्छाइयों को आत्मसात करने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि अब तक जितनी भी नकारात्मक छवि इन साहब की बनी थी, वह भी खत्म होते जा रही है और बड़े साहब भी इन्हें आगे बढ़कर निर्णय लेने का मौका दे रहे हैं। सबसे बड़ी बात, उन्‍होंने इन पर भरोसा करना भी शुरू कर दिया है। हाल ही में हुजूर तहसील में जिले के मुखिया दौरा करने गए। शाम के समय हुए इस दौरे के दौरान बड़ी कार्रवाई की प्लानिंग से वरिष्ठ अधिकारियों को रूबरू करवाया गया। दौरे में भी शहर के मुखिया ने इन्हें अपने साथ रखा।

चोरी तो फाइलें हुई थीं

राजधानी के 12 दफ्तर स्थित पंजीयन विभाग के रिकॉर्ड रूम से विगत दिनों रजिस्ट्री संबंधी महत्वपूर्ण दस्तावेज चोरी हो गए। हैरत की बात तो यह है कि इस घटना को लेकर विभागीय अधिकारियों ने सिर्फ ताला टूटने की एफआइआर दर्ज कराई है। अधिकारियों के मुताबिक यहां से कुछ भी चोरी नहीं हुआ, लेकिन यहां के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि यहां से महत्वपूर्ण फाइलें चोरी हो चुकी हैं और विभागीय अधिकारी इस बात को ज्यादा बढ़ाना नहीं चाहते हैं, इसलिए एफआइआर में गायब हुई फाइलों का जिक्र भी नहीं है। विभागीय अधिकारियों के इस रवैए से पूरे मामले में संदेह हो रहा है कि कहीं यह चुपके से हुई चोरी किसी साजिश के तहत तो नहीं कराई गई है। बता दें कि इससे पहले भी यहां फाइलें गायब होना, रिकॉर्ड रूम में आग लगने जैसे छोटी-मोटी घटनाएं दर्ज होती रही हैं, लेकिन अब यह मामला महत्वपूर्ण फाइलों का है।

Posted By: Ravindra Soni

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