-लेक व्यू परिसर पर जमा हुए एलजीबीटी ग्रुप के सदस्य और सोशल एक्टिविस्ट

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

प्यार है प्यार...हमें मिला अपना अधिकार...मर्जी से जीवन की समानता का प्रतीक...जैसे नारे लिखी तख्तियां दिखाते और छह रंगों से सजा गौरव ध्वज अपने हाथों में लिए हुए युवा जैसे ही निकले, वैसे ही गुरुवार की शाम साढ़े पांच बजे बोट क्लब पर तफरीह करने निकले सैलानी रोमांचित हो उठे। पर्यटकों के जेहन में एक ही सवाल उठा कि बड़े तालाब के किनारे किस अधिकार के लिए प्रोटेस्ट कर रहे हैं। करीब जाकर उन्होंने मीडिया की अटेंशन और युवाओं के हाथों में समानता के अधिकारों के स्लोगन लिखी तख्तियां देखी तो माजरा खुद-ब-खुद समझ में आ गया। दरअसल, ब्रिटिशकालीन 158 साल पुराने कानून में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक संबंध को अपराध न मानते हुए हर किसी को अपनी मर्जी से जीने का हक दिए जाने को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। इस फैसले के सेलिबे्रशन के लिए ही युवाओं का एक जत्था जुटा। लिहाजा, एलजीबीटी के हक में आए इस निर्णय को सेलिबे्रट करते हुए युवाओं ने गौरव ध्वज को लहराया और अपनी खुशी जाहिर की। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पुरजोर स्वागत किया।

-आंदोलनों से मिली यह सफलता

सोशल एक्टिविस्ट कोकिला ने बताया कि हमारे सामने शहर के ऐसे कई लोग आए, जो समलैंगिकता को मान्यता देते थे। हमने ऐसे लोगों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए कई आंदोलन किए। सुप्रीम कोर्ट का आदेश हमें गर्व महसूस कराता है। मानवता और हर इंसान को समानता का अधिकार मिलना एक विश्व की पहली प्राथमिकता है। एलजीबीटी संगठन के सदस्य बताते हैं कि हमें इस बात के लिए गर्व है कि एलजीबीटी समुदाय को समानता का अधिकार है। इसका मतलब यही है कि हम खुश रह सकते हैं। समाज में समानता का उत्सव मना सकते हैं। आमतौर पर समाज में ऐसे मुद्दों को कुंठित मानसिकता से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। हम आगे भी अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। समाज अब समलैंगिकता को किस हद तक अपनाता है? यह हमारे लिए चुनौतिपूर्ण होगा। इसे अपनाने के लिए भी हम लोगों को जागरूक करेंगे।

-ध्वज के छह रंग कुछ कहते है

युवाओं व एक्टिविस्ट का गौरव ध्वज लहराना इस दौरान आकर्षण का केंद्र रहा। गौरव ध्वज में शामिल लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला और बैंगनी रंग अलग-अलग संदेशों को बयां करता है। दरअसल, छह रंगों के ध्वज को गर्व का प्रतीक दर्शाने एलजीबीटी समुदाय ने मान्यता दी है। विश्व के कई शहरों में गौरव परेड होती है। इस तरह के उत्सवों में ध्वज को विशेष महत्व दिया जाता है। आमतौर पर आयोजन जून महीने में होते हैं। इन उत्सवों के जरिए एलजीबीटी अधिकारों पर लोगों को ध्यान आकर्षित किया जाता रहा है।

-अपराध के दायरे से बाहर हुआ मामला

कोर्ट ने माना कि समलैंगिक समानता कोई अपराध नहीं है। हर इंसान को समाज में अपने तरीके से रहने का अधिकार है। ऐसे यौन संबंधों को अपराध के दायरे में रखना संविधान के अधिकारों का हनन है। शीर्ष अदालत ने धारा-377 के तहत सहमति से समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया।

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वर्जन-समानता का अधिकार मिले

मैं चाहता हूं कि समलैंगिकता को समाज में समानता का अधिकार मिले। कोर्ट ने मानवता के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए मैं उनका आभारी हूं।

-आरको, स्टूडेंट

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-अपने तरीके से रहने का अधिकार

मेरा मानना है कि समाज में सभी को अपने तरीके से रहने का अधिकार होना चाहिए। कोर्ट ने इस बात को प्राथमिकता दी है। समलैंगिक होने में कोई बुराई नहीं है।

श्यामभवी, स्टूडेंट

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-अब कहीं जाकर मिली सफलता

समलैंगिकता अधिकार के लिए हम कई सालों से प्रयासरत थे। हमें अब कहीं जाकर सफलता मिली। समलैंगिक होने में कोई अपराध नहीं है, बल्कि यह गर्व की बात है।

-कोकिला भट्टाचार्य, सोशल एक्टिविस्ट

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-समाज गंभीरता से ध्यान नहीं देता

समलैंगिकता के पीछे भी कई तरह के कारण हो सकते हैं। समाज इस गंभीरता पर ध्यान नहीं देता है। कोर्ट के आदेश के बाद इस विषय में निश्चित ही लोगों की मानसिकता बदलेगी।

-श्रुति, स्टूडेंट