-लिटरेचर इवेंट

-एसवीएल में क्लब लिटराटी की ओर से 'ये जो कुछ मैंने लिखा है'का आयोजन

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में शनिवार को क्लब लिटराटी की ओर से 'ये जो कुछ मैंने लिखा है'का आयोजन किया। हिन्दी भाषा के महत्व का संदेश देता यह कार्यक्रम, 1987 बैच के आईएएस मनोज कुमार श्रीवास्तव की रचित कुछ कविताओं पर केंद्रित रहा। इस मौके पर उन्होंने अपनी कुछ कविताओं का पाठ करते हुए बताया कि किस प्रकार वे अपनी कविताओं में प्रकृति संबंधित प्रतीकों का उपयोग करते है। उन्होंने प्रकृति और मनुष्य जीवन के विरोधाभास को बहुत ही सहजता से अपनी कविताओं के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि मुझे हमेशा से ही प्रकृति से प्रेम रहा है। कक्षा पांचवी से कविताएं पढ़ रहा हूं। मेरे घर पर भी एक लाइब्रेरी है, मेरे संस्कारों में था तो मैं पढ़ता गया। आज देखा जाता है कि पुरानी क्लासिक पुस्तकें बर्बाद हो गई। मुझ पर हिंदी में जयशंकर प्रसाद और तुलसीदास का प्रभाव पड़ा। जीवन में एक सरल स्वभाव का होना कितना आवश्यक है और हिंदी की सरलता भी प्राकृतिक है। साहित्य की ओर उनका झुकाव शुरू से रहा और इसी वजह से उन्होंने हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर किया। साहित्य लेखन मुझे रोजमर्रा के जीवन में संतुष्टि देता है। कार्यक्रम में उन्होंने कविता 'मां तुम्हें पता है...' और भ्रूण हत्या पर केंद्रित कविता 'मां लोग कहते हैं तुम मत आओ इस दुनिया में...' सहित अन्य कविताएं सुनाई।

-कवि से प्रशासक बना हूं

इस चर्चा में उनके साथ डॉ. नीलकमल कपूर ने उनकी लिखी कविताएं बधान, फिराक और शिक्षा की भाषा से इतर इत्यादि कविताओं के माध्यम से उनके लेखन पर बातचीत की। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि वह पांचवी कक्षा से कविताएं लिखते आ रहे हैं। वह कवि से प्रशाशक बने न कि प्रशासक से कवि बनने की यात्रा शुरू की। चर्चा में उन्होंने बताया कि चीन में लिटरेरी स्कॉलर भी प्रशासक होते हैं। प्रशासन ने उनकी कविताओं को और निखारा। वे कहते हैं कि कविता भी एक सेवा है।