भोपाल Madhya Pradesh Cabinet Expansion । मप्र में मुख्यमंंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज लंबे इंतजार के बाद आखिर कैबिनेट विस्तार कर दिया। मंत्रिमंडल में सिंधिया खेमे के नौ विधायकों को मंत्री बनाया गया है। आइए जानते हैं सिंधिया गुट से शामिल किए गए इन विधायकों का कैसा रहा है राजनीतिक सफर -

महेंद्रसिंह सिसोदिया

महेन्द्र सिंह सिसोदिया कमलनाथ सरकार में भी भी श्रममंत्री रह चुके हैं। महेंद्र सिसोदिया बमोरी (गुना) विधानसभा सीट से चुने गए हैं। 2018 में लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। 'संजू भैया' के नाम से महशूर सिसोदिया ज्योतिरादित्य सिंंधिया के काफी करीबी माने जाते हैं।

प्रद्युम्न सिंह तोमर

प्रद्युम्न सिंह तोमर का जन्म 1 जनवरी, 1968 को मुरैना में हुआ। स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त करने वाले तोमर ने सियासी सफर की शुरूआत 1984 से की। 2008 में पहली बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे।25 दिसम्बर 2018 को मुख्यमंत्री कमलनाथ के मंत्रिमंडल शामिल हुए थे।

इमरती देवी

कमलनाथ सरकार में भी मंत्री रह चुकी इमरती देवी अब फिर से मंत्री बनी है। पहली बार 2008 में विधायक चुनी गई थी। वर्ष 2019 में गणतंत्र दिवस पर भाषण न पढ़ पाने के कारण सुर्खियों में रही थी। उस समय इमरती देवी की काफी किरकिरी भी हुई थी। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि बीमार होने के कारण भाषण नहीं पढ़ पाई थी।

सुरेश धाकड़ (राठखेड़ा)

सुरेश धाकड़ पौहरी से विधायक हैं और सिंधिया के काफी करीबी माने जाते हैं। जब मध्यप्रदेश में सियासी उलटफेर चल रहा था, तब सुरेश धाकड़ भी बंगलुरू जाने वाली विधायकों में शामिल थे। उसी दौरान उन्हें बेटी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

ओपीएस भदौरिया

49 साल के ओपीएस भदौरिया मेहगांव सीट से विधायक चुने गए हैं। 1.27 करोड़ की संपत्ति के मालिक ओपीएस भदौरिया भी सिंधिया के कट्टर समर्थक हैं। कमलनाथ सरकार के दौरान कांग्रेस विधायक रहते हुए भी उन्होंने सरकार के खिलाफ बगावती तेवर दिखाए थे और कमलनाथ सरकार पर झूठे केस में फंसाने का आरोप लगाया था।

गिर्राज दंडोतिया

दिमनी सीट से चुन कर आए गिर्राज दंडोदिया पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। अपने इलाके में अच्छा रसूख रखने वाले दंडोतिया तब चर्चा में आए थे, उन्होंने एक विवादास्पद बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि बीजेपी के नेता खून बहाएंगे तो हम गर्दन काट कर लाएंगे। इसके बाद विधानसभा में भी हंगामा हुआ था।

बृजेंद्र सिंह यादव

ब्रजेंद्र सिंह यादव मध्यप्रदेश की मुंगावली सीट से विधायक चुने गए हैं। सिंधिया समर्थक ब्रजेंद्र सिंह यादव ने पंचायत चुनाव से अपनी सियासी सफर शुरू किया था। 2018 में उपचुनाव में पहली बार विधायक चुने गए थे और उसके बाद विधानसभा चुनाव में भी सिंधिया के करीब होने का कारण टिकट मिला और जीत हासिल की।

प्रभुराम चौधरी

प्रभुराम चौधरी कमलनाथ सरकार के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री थे। प्रभुराम चौधरी वर्ष 1985 में पहली बार आठवीं विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। चौधरी वर्ष 1991 में मप्र कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य, वर्ष 1996 में संयुक्त सचिव और वर्ष 1998 में महामंत्री बने। वे मप्र कांग्रेस में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।

राज्यवर्धन सिंह

राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव धार की बदनावार विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया का करीबी माना जाता है, उनके पिता भी राजनीति में थे और माधवराव सिंधिया के काफी करीबी थे। राज्यवर्धन सिंह साल 1990 में लुफ्तांसा में मार्केटिंग मैनेजर की नौकरी करते थे लेकिन एक घटना के बाद राज्यवर्धन सिंह ने नौकरी छोड़कर सियासत में कदम रखा और निर्दलीय चुनाव लड़ा था। साल 2018 में राज्यवर्धन बदनावर सीट से तीसरी बार विधायक चुने गए, उन्हें कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में मंत्री पद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मंत्री पद के लिए उनके नाम की अनदेखी की गई।

Posted By: Sandeep Chourey

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