LockDown Effect on Industries : भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में कोरोना संकट व लॉकडाउन के कारण श्रमिकों के पलायन ने छोटे-बड़े सभी उद्योगों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। दुनिया के उद्योग जगत में प्रदेश की पहचान टेक्सटाइल्स, फार्मा, ऑटोमोबाइल्स, खनिज आधारित, सोया एवं फूड प्रोसेसिंग उद्योगों से है। रात के कर्फ्यू के चलते अभी एक शिफ्ट में काम शुरू हुआ है, लेकिन ऐसे प्लांट जिन्हें बंद नहीं कर सकते, उनकी समस्याएं अलग हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आपदा के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकसित करने का मौका भी है। अपने गांव लौटे श्रमिकों को वहीं रोजगार मिले तो वह कम पैसे में भी काम करेगा।

मध्य प्रदेश में मालवा, महाकोशल, विंध्य, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में मौजूद सभी छोटे-बड़े उद्योगों में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते एक जैसी समस्याएं हैं। रात में कर्फ्यू के कारण एक शिफ्ट में फैक्ट्रियों ने काम शुरू किया है, लेकिन ऐसे प्लांट जिन्हें लगातार चलाना मजबूरी है, उनके साथ अपनी दिक्कतें हैं। इनमें ऑटोमोबाइल, फार्मा, बॉटलिंग, कोल्ड ड्रिंक, दूध एवं कपड़े बुनाई आदि के प्लांट शामिल हैं, जिन्हें अनवरत चलाना जरूरी है। इन्हें दो शिफ्ट से कम चला ही नहीं सकते।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुधारने का मौका : कोठारी पीथमपुर एसईजेड, मालनपुर, मंडीदीप, पीलूखेड़ी, गोविंदपुरा, देवास और जबलपुर-छिंदवाड़ा अंचल के उद्योगों से जो श्रमिक पलायन कर गए हैं, उनके जल्दी ही वापसी की उम्मीद नहीं है। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी एवं अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि घरों को लौटे ये श्रमिक डरे हुए हैं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकसित करने ग्रामीण क्षेत्रों को 'नो इंडस्ट्री' क्षेत्र घोषित कर नए उद्योगों को 10 साल के लिए यदि टैक्स में छूट दी जाए तो अर्थव्यवस्था नया उछाल दिखने लगेगा।

एक लाख करोड़ का नुकसान

गौतम कोठारी कहते हैं कि फिक्की का अध्ययन कहता है कि मप्र में अब तक करीब एक लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। पीथमपुर में 850, मंडीदीप में 750 इकाइयां हैं, जिनमें से अभी 300 संचालित हैं। महाकोशल में 450 हैं। प्रदेश में छोटे-मझोले करीब 3.5 लाख उद्योग हैं, जबकि स्व सहायता समूह और छोट लघु उद्योगों को भी गिनें तो करीब 12 लाख इकाइयां हैं, जिनमें 45 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

हरसंभव मदद करेंगे

उद्योगों को अभी कुछ समय धैर्य की जरूरत है। इस आपदा से उद्योग अब नए सिरे से अपनी एचआर पॉलिसी और श्रमिक हित से जुड़ी नीतियों पर भी ध्यान देंगे। केंद्र सरकार के पैकेज का लाभ भी मिलेगा। राज्य सरकार की तरफ से भी हरसंभव मदद की जाएगी। - संजय शुक्ला, प्रमुख सचिव, उद्योग विभाग मप्र

सप्लाई चैन शुरू हो

शर्मा छोटे-बड़े उद्योग त्राहिमाम कर रहे हैं। यातायात के साधन और सप्लाई चैन टूट गई है, इसे बहाल किए बिना फैक्ट्रियों के चक्के नहीं चल पाएंगे। रॉ मैटेरियल की दिक्कतें तभी दूर होंगी। - दीपक शर्मा, अध्यक्ष, लघु उद्योग संघ मप्र

श्रमिकों की काउंसिलिंग

पलायन करने वाले श्रमिकों की यदि काउंसिलिंग करते तो उन्हें रोका जा सकता था, क्योंकि गांवों में भी वे खुशहाल नहीं रहेंगे। हमने उन्हें बिना काम वेतन और खाना भी दिया लेकिन प्रशासन ने बसों में बिठाकर घर भेज दिया। अब फैक्ट्री कैसे चालू करें। - राजीव अग्रवाल, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज मंडीदीप

डरे हुए हैं उद्योगपति

टैक्स, बिजली, किराया, वेतन और लीज रेंट आदि खर्चे यथावत हैं। लॉकडाउन का आगे क्या स्वरूप होगा, अभी स्पष्ट नहीं है। उद्योगपति डरे हुए हैं, उन्हें राहत की दरकार है। 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का अब तक कोई सर्कुलर ही नहीं आया। - नरेंद्र भाई सोमैया, अध्यक्ष, महाकोशल उद्योग संघ

अर्थव्यवस्था के लिए उद्योग जरूरी

छोटे उद्योगों को राहत चाहिए, अभी उन्हें बैंक ऋण की जरूरत नहीं। ये उद्योग जिंदा रहेंगे तो ही अर्थव्यवस्था चलेगी, एक बार उद्योग पटरी से उतर गए तो फिर सौ गुना ताकत लगानी पड़ेगी। - महेश गुप्ता, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती मप्र

Posted By: Prashant Pandey

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