LockDown Effect on Industries धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। कोरोना वायरस के प्रकोप ने आम जनजीवन के साथ ही प्रदेश के उद्योग-धंधों पर भी बुरा असर डाला है। लॉकडाउन के कारण प्रदेश की समूची औद्योगिक अर्थव्यवस्था मुश्किल स्थिति में है। न निर्यात हो रहा है न उत्पादन, ऊपर से खर्च यथावत है। प्रदेश में बड़े, छोटे और मध्यम उद्योग करीब डेढ़ लाख हैं, लॉकडाउन के कारण इनकी हालत पतली होना तय है।

वृहद उद्योगों को तो सिर्फ उत्पादन और निर्यात न होने से नुकसान हो रहा है। उनका लाभांश और रिजर्व आर्थिक क्षमता इतनी होती है कि वे लॉकडाउन खत्म होने के बाद दोबारा खड़े भी हो जाएंगे लेकिन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों पर ज्यादा संकट है।

लगभग 10 करोड़ सालाना टर्नओवर वाले इन उद्योगों को बेहद नुकसान उठाना पड़ा है। ये उद्योग ज्यादातर काम उधारी पर करते हैं, अब उधारी न मिलने से पुराना पैसा डूब सकता है और बैंक के कर्ज के कारण दोबारा खड़ा होना भी मुश्किल होगा। उद्योगपतियों को कर्मचारियों का वेतन भी देना है, बिजली का बिल है, बैंक की किस्त भी समय पर देना है और तो और प्रशासनिक दबाव में उन पर खाने के पैकेट बांटने की जिम्मेदारी भी सौंपी जा रही है। आखिर उद्योग-धंधे पटरी पर कैसे आ पाएंगे।

मप्र से पचास हजार करोड़ रुपये का निर्यात

प्रदेश में कई ऐसे वृहद उद्योग हैं, जिनसे पचास हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। मंडीदीप स्थित एचईजी से सालाना 13 हजार करोड़, वर्धमान टेक्स्टाइल से 6500 करोड़ और ल्यूपिन फार्मा कंपनी से 18 हजार करोड़ की दवाएं निर्यात की जाती हैं। ऐसे ही कई अन्य उद्योग पीथमपुर व मालनपुर में भी हैं। इन 767 से ज्यादा उद्योगों में 13 लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है।

डेढ़ लाख से ज्यादा छोटे उद्योग

प्रदेश में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्योग सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराते हैं। लगभग 14,256 करोड़ के पूंजी निवेश वाला इस क्षेत्र पर कोरोना ने संकट खड़ा कर दिया है। इन छोटे 1,59,274 उद्योगों ने प्रदेश में पांच लाख सड़सठ हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है।

तैयार किया जा रहा है रोडमैप

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की समस्याओं को लेकर विचार किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि कोरोना संकट की वजह से प्रभावित कारोबारियों को राहत पहुंचाई जाए। जल्द ही इसका रोडमैप तैयार होगा।

- मनु श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग

ब्याज और वेतन पर सब्सिडी देना होगी उद्योगों को मंदी के दौर से निकालने के लिए राज्य सरकार को औद्योगिक नीति बदलना होगी। सरकार ने कहा, मजदूरों को वेतन दो, मार्च में तो दे दिया लेकिन अप्रैल का वेतन कैसे देंगे। सरकार को यदि इन्हें दोबारा खड़ा करना है तो ब्याज और मजदूरों के वेतन पर सब्सिडी की नीति बनाना होगी राजेंद्र कोठारी, पूर्व निदेशक, पीएचडी चैम्बर ऑफ कामर्स, मप्र-छग

उद्योगपतियों से सुझाव मांगे

मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'नईदुनिया' से कहा कि औद्योगिक क्षेत्र को संकट से उबारने के लिए विशेषज्ञों की कमेटी विचार कर रही है। उद्योगपतियों से भी सुझाव मांगे गए हैं कि आखिर अर्थव्यवस्था को कैसे पटरी पर लाया जाए। दवा उद्योग को तो कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए प्रारंभ करने के लिए कहा गया है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद कारोबार को भी पटरी पर लाने का प्रयास किया जाएगा। मैं खुद भी उद्योगपतियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अन्य जरिए से बात करूंगा।

आप भी दे सकते हैं सुझाव- इस कठिनतम दौर से उत्कृष्ट प्रयास और दृढ़ निश्चय के साथ कोशिश की जाए तो उबरा भी जा सकता है। इस पर आप भी अपने सुझाव दे सकते हैं। आप उद्यमी हों, कारोबारी हों या उद्योगों के हितैषी, आप अपने विचार नईदुनिया से साझा कर सकते हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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