भोपाल। विधानसभा में गुरुवार को बिजली के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष में जमकर तकरार हुई। पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह और भाजपा विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया ने किसानों को दिन में आठ घंटे बिजली आपूर्ति और अघोषित कटौती पर सवाल उठाए।

ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने ट्रिपिंग के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि 2018 से कम ट्रिपिंग हुई है। दिन में आठ घंटे बिजली देने का प्रयोग समूह बांटकर कर रहे हैं। पहले भी बिजली जाती थी पर सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंगती थी, अब सरकार एक्शन मोड में है। बीते तीन-चार साल में रखरखाव का काम ही नहीं हुआ। उपकरणों की गुणवत्ता भी खराब है, इसकी वजह से समस्या आ रही है।

प्रश्नकाल के दौरान भूपेंद्र सिंह ने किसानों को दिन में आठ घंटे बिजली देने की घोषणा के बारे में सवाल पूछा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि समूह बनाकर बालाघाट, हरदा और होशंगाबाद में प्रयोग किया है। पाक्षिक आधार पर यह व्यवस्था बनाने पर काम चल रहा है। जल्द ही इस पर नीतिगत निर्णय लेंगे। हमारी नीयत साफ है। वचन पत्र को पूरा करने सरकार संकल्पित हैं।

इस पर जब सवाल उठाया तो वित्तमंत्री तरुण भनोत ने कहा कि इतनी अधीरता क्यों, वचन पत्र पांच साल के लिए है, उसे पूरा करेंगे। सिंह ने इस पर उन्हें टोकते हुए कहा कि बजट में 10 घंटे बिजली देने की बात कही है और वचन पत्र में 12 घंटे की बात है। ऊर्जा मंत्री ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि थोड़ा धैर्य रखें। विरासत में हमें 42 हजार करोड़ रुपए के घाटे की कंपनियां मिली हैं। 15वें वित्त आयोग ने भी 36 प्रतिशत लॉस का मुद्दा उठाया है।

उधर, यशपाल सिंह सिसौदिया ने रखरखाव नहीं करने, अघोषित कटौती, चमगादड़ की वजह से ट्रिपिंग, कर्मचारियों के निलंबन और एफआईआर को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है। बिजली कब चली जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर का प्रपंच रचा जा रहा है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार ने पिछले साल मई-जून में रखरखाव का काम नहीं कराया।

अक्टूबर-नवंबर में भी यह काम नहीं हुआ। मतदान होने से संधारण का काम रोका गया। घरेलू लाइन, ट्रांसफार्मर का रखरखाव भी नहीं किया। खराब गुणवत्ता के उपकरण खरीदे गए। इसकी वजह से परेशानी हुई। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को बिजली छेड़छाड़ की 18 शिकायतें मिली थीं।

पांच में एफआईआर हुई और 13 के आवेदन पुलिस को दिए हैं। इंदौर में बारिश-तूफान की वजह से बिजली गई थी, जिसे एक घंटे में हमारे कर्मचारियों ने व्यवस्थित कर दिया। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने उपकरण की खराबी के आरोप पर कहा कि 12-15 साल से ये ठीक काम कर रहे थे। एकाएक खराब कैसे हो गए।

ऊर्जा मंत्री ने जवाब में कहा कि हमारी सरकार और मुख्यमंत्री कमलनाथ सजग हैं, इसलिए एक्शन मोड में दिख रहे हैं। पहले कान में जूं नहीं रेंगती थी। चमगादड़ का मामला सिर्फ उत्तर भोपाल जोन का है। इसे पूरे प्रदेश से जोड़कर नहीं देख सकते हैं।

चर्चा के दौरान चमगादड़ को लेकर वित्तमंत्री तरुण भनोत की टिप्पणी पर काफी विवाद हुआ। इसे लेकर गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह ने आपत्ति दर्ज कराई। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों के आपत्तिजनक संवाद को रिकॉर्ड से हटवा दिया।