Madhya Pradesh Assembly: भोपाल। नवदुनिया स्टेट ब्यूरो। लव जिहाद को रोकने के लिए विधानसभा में सोमवार को गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक प्रस्तुत करेंगे। सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से कानून को लागू किया है। इसमें प्रलोभन देकर, बहलाकर, बलपूर्वक या मतांतरण करवाकर विवाह करने या करवाने वाले को एक से लेकर दस साल के कारावास और अधिकतम एक लाख रुपये तक अर्थदंड से दंडित करने का प्रविधान है। अध्यादेश लागू करने के बाद से 11 फरवरी तक 23 प्रकरण दर्ज हुए हैं। इनमें सर्वाधिक भोपाल संभाग में सात, इंदौर संभाग में पांच, जबलपुर व रीवा संभाग में चार-चार और ग्वालियर संभाग में तीन मामले दर्ज हो चुके हैं।

विधानसभा में इसके अलावा निजी विश्वविद्यालय संशोधन, डॉ. बीआर अंबेडकर, पंडित एसएन शुक्ला और भोज मुक्त विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे। पन्ना नेशनल पार्क के विस्तार के लिए विस्थापित किसानों को भू-अधिकार पुस्तिका न देने और छतरपुर में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं होने के मुद्दे ध्यानाकर्षण के माध्यम से उठाए जाएंगे।

धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक के प्रमुख प्रविधान

- महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति, जनजाति के व्यक्ति का मतांतरण करवाने पर कम से कम दो तथा अधिकतम दस साल के कारावास तथा कम से कम पचास हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा।

- सामूहिक मतांतरण, दो या दो से अधिक व्यक्तियों का एक ही समय मतांतरण अध्यादेश के प्रविधानों के विरुद्ध होगा। उल्लंघन पर कम से कम पांच और अधिकतम 10 साल का कारावास तथा कम से कम एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा।

- मतांतरण के मामले में शिकायत माता, पिता, भाई-बहन को पुलिस थाने में करनी होगी। अभिभावक भी प्रकरण दर्ज करा सकेंगे।

- इसके तहत दर्ज अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होगा। इसकी सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी।

- मूल मत में वापसी को मतांतरण नहीं माना जाएगा। मूल मत वह माना जाएगा, जो जन्म के समय पिता का मत होगा।

- पीड़ित महिला एवं उससे जन्मे बच्चे को भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार होगा। बच्चे को पिता की संपत्ति में उत्तराधिकारी भी माना जाएगा।

- उपनिरीक्षक स्तर से नीचे का अधिकारी जांच नहीं कर सकेगा।

- अध्यादेश में निर्दोष होने के सुबूत प्रस्तुत करने की बाध्यता अभियुक्त पर रखी गई है।

- मतांतरण करवाने वाली संस्था के सदस्यों के खिलाफ भी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध के समान ही सजा दी जाएगी।

- स्वेच्छा से मतांतरण करने और करवाने वाले को 60 दिन पहले कलेक्टर को इसकी सूचना देनी होगी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 
Show More Tags