भोपाल। Madhya Pradesh Assembly Winter Session मध्‍यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में नवनिर्वाचित विधायक कांतिलाल भूरिया और स्पीकर द्वारा अयोग्य ठहराए गए भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की बैठक व्यवस्था को लेकर सस्पेंस है।

मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं के कारण भूरिया की बैठक व्यवस्था मंत्री के रूप में अग्रिम पंक्ति में होने तथा विधायक के तौर पर ही सदन में बैठने पर उनके बैठने का इंतजाम वरिष्ठता के आधार पर किया जाएगा। यही स्थिति, भाजपा विधायक दल के सामने हैं, क्योंकि प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त करने के स्पीकर के आदेश के बाद उनका सदन में बैठना अब सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर टिका है।

मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 17 दिसंबर से शुरू होने वाला है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस विधायक कांतिलाल भूरिया करीब 20 साल बाद फिर से विधानसभा की सदन में बैठेंगे। भूरिया की विधानसभा में बैठने की व्यवस्था पर कांग्रेस अभी तक कोई फैसला नहीं कर सकी है। कमलनाथ मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावनाओं के चलते भूरिया की सीट मंत्रियों के साथ होने के आसार जताए जा रहे हैं।

मगर उप चुनाव में टिकट वितरण के समय ही भूरिया के सामने मंत्री पद की मांग के बिना काम करने की शर्त रख दी गई थी, जिससे फिलहाल शीतकालीन सत्र में उनके विधायक के तौर पर ही सदन में बैठने की संभावना ज्यादा दिखाई दे रही है।

मंत्री बनने की स्थिति में भूरिया की बैठक से अग्रिम पंक्ति में भारी परिवर्तन होगा, जिसमें डॉ. गोविंद सिंह, सज्जन सिंह वर्मा, डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ जैसे मंत्रियों के स्थान भी बदले जा सकते हैं। विधायक बनने पर भी उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और उन्हें अग्रिम पंक्ति में जगह दी जा सकती है।

उधर, आपराधिक प्रकरण में दो साल की सजा के बाद भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति के सदस्यता समाप्त किए जाने के फैसले से प्रभावित हैं और इसके बाद वे हाईकोर्ट से स्थगन ले आए। सरकार उसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय पहुंची है।

मामला अदालत में होने से उनकी विधानसभा की सदस्यता को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। संबंधित सभी पक्ष अधिनियम और अदालत की राहत के आदेशों को अपनी-अपनी तरह से परिभाषित कर रहे हैं। इससे उनके विधानसभा की बैठक व्यवस्था पर भी असमंजस की स्थिति है।

दोनों दलों को पत्र भेजा

शीतकालीन सत्र के लिए कांग्रेस और भाजपा को विस की ओर से पत्र भेजे गए हैं। उनसे अपने-अपने विधायकों की बैठक व्यवस्था में परिवर्तन को लेकर सुझाव मांगे हैं। राजनीतिक सत्र शुरू होने के एक सप्ताह पहले तक विधायकों की बैठक व्यवस्था पर अपने सुझाव दे सकते हैं।

- एपी सिंह, प्रमुख सचिव, मप्र विधानसभा

Posted By: Hemant Upadhyay