भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। Madhya Pradesh Board Exams अभी बोर्ड परीक्षा का समय है। ऐसे में बच्चों में बेहतर करने का दबाव बढ़ रहा है। राजधानी के मनोचिकित्सकों के पास इन दिनों एग्जाम फोबिया और परफार्मेंस प्रेशर के चलते कई केस तनाव के आ रहे हैं। ऐसे में अभिभावक भी बच्चों को काउंसिलिंग के लिए लेकर पहुंच रहे हैं। अभी एक माह में करीब 10 से 12 मामले बच्चों में परीक्षा के तनाव के आ रहे हैं।

इनमें 14 से 17 साल के बच्चों में तनाव के कारण घबराहट, नींद न आना और भूख न लगने की शिकायत सामने आ रही है। मनोचिकित्सकों का मानना है कि परीक्षा के समय अभिभावक व शिक्षकों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। ज्ञात हो कि इस साल मप्र बोर्ड की परीक्षा 2 मार्च से शुरू हो रही है। इसमें प्रदेश से करीब 20 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे।

केस-1

भेल क्षेत्र का 12वीं का एक छात्र काउंसिलिंग के लिए पहुंचा। उसने बताया कि उसके घर का माहौल नकारात्मक है। उसके पिता उसे 12वीं के साथ जेईई की परीक्षा क्लियर करने का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि चाचा के बेटे ने दोनों एक साथ क्लियर किया है। इससे तनाव हो रहा है कि नहीं हुआ तो क्या होगा।

केस-2

साकेत नगर क्षेत्र का दसवीं कक्षा के एक छात्र को उसके अभिभावक लेकर मनोचिकित्सक के पांच पहुंचे। उनका कहना था कि बच्चे को अभी तक लग रहा था कि उसकी तैयारी पूरी हो गई है, लेकिन जब प्री-बोर्ड का रिजल्ट अच्छा नहीं आया तो उसे काफी तनाव हो रहा है। अब उसे ऐसा लग रहा है कि वह सबकुछ भूल गया है। बच्चे में आत्मविश्वास की कमी आ गई है।

इनका कहना है

बच्चों में परफार्मेंस प्रेशर के कारण तनाव होता है। इससे उनका रिजल्ट बिगड़ जाता है। तनाव के कारण बच्चों का परफार्मेंस प्रभावित होता है। आजकल ऐसे कई मामले आ रहे हैं।

डॉ. पूनम सिंह, मनोचिकित्सक

बच्चों में बेहतर करने के दबाव के कारण उनके दिमाग में तनाव उत्पन्न होता है और उनकी स्मृति व बुद्घि पर असर पड़ता है। ऐसे में बच्चों में निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास में कमी आ रही है, इसलिए अभिभावक बच्चों पर प्रेशर न डालें।

डॉ. राहुल शर्मा, मनोचिकित्सक

अभिभावक क्या करें

- बच्चों पर बेवजह दबाव न डालें।

- दूसरे बच्चों से तुलना न करें।

- उनके पसंद का काम भी करने दें।

- घर का माहौल तनावग्रस्त न बनाएं।

बच्चे क्या करें

- अपनी पसंद के गाने सुनें।

- ध्यान, योगा या वॉक करें।

- 7 से 8 घंटे की पूरी नींद लें।

- आत्मविश्वास बनाए रखें।

परीक्षा तनाव के एक माह में केस - 10 से 12

किस उम्र के बच्चों में तनाव - 14 से 17 वर्ष

इस साल का आंकड़ा

10वीं में विद्यार्थियों की संख्या- 11 लाख 29 हजार

12वीं में विद्यार्थियों की संख्या- 8 लाख 2 हजार

10वीं में प्रायवेट विद्यार्थियों की संख्या- 1 लाख 21 हजार 361

12वीं में प्रायवेट विद्यार्थियों की संख्या- 1 लाख 13 हजार

10वीं के परीक्षा केंद्र - 3,936

12वीं के परीक्षा केंद्र -3,657

संवेदनशील केंद - 448

अति संवेदनशील केंद्र- 257

भोपाल जिले में परीक्षा केंद्र - 97

2019 - करीब 15 लाख विद्यार्थी

10वीं - 8 लाख 64 हजार 753

12वीं - 5 लाख 84 हजार 664

2018 - करीब 18 लाख विद्यार्थी

10वीं - 11 लाख 32 हजार 41

12वीं - 7 लाख 32 हजार 319

Posted By: Nai Dunia News Network