Madhya Pradesh Budget 2021-22: भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। विधानसभा में शिवराज सरकार मंगलवार को वर्ष 2021-22 का बजट प्रस्तुत करेगी। बजट के फोकस में आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए कृषि, रोजगार, कर्मचारी, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र रहेगा। 2023 का लक्ष्य साधने के लिए मिशनमोड में योजनाएं चलेंगी। जल जीवन मिशन के तहत तीन साल में एक करोड़ से ज्यादा ग्रामीणों को नल के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

बड़ी संख्या में रेलवे ओवर ब्रिज के साथ चंबल और नर्मदा एक्सप्रेस वे के लिए वित्तीय प्रविधान प्रस्तावित हैं। कृषि सहित अन्य योजनाओं के लिए विभागों को पैकेज बनाकर बजट दिया जाएगा। बजट के 2.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होने का अनुमान है। वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा लैपटाप या टैबलेट के माध्यम से बजट भाषण पढ़ेंगे। सदस्यों को इस बार प्रति मिलेगी पर अगले साल से यह पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा।

किसान

किसानों के लिए बजट में 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रविधान प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तरीके से किए जा सकते हैं। किसान सम्मान निधि के लिए साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये का प्रविधान राजस्व विभाग के बजट में रहेगा तो बिजली सबसिडी के लिए ऊर्जा विभाग को दस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा मिलने की उम्मीद है। शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण दिलाने के लिए सात सौ करोड़ रुपये से अधिक रखे जा सकते हैं तो फसल बीमा, प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भी राशि रखने पर सहमति है।

कर्मचारी

प्रदेश के 10 लाख से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनधारियों का महंगाई भत्ता (डीए) और राहत (डीआर) बढ़ाने की घोषणा बजट में होगी। इसके तहत पांच प्रतिशत लंबित के साथ आगामी डीए और डीआर के लिए प्रविधान किए जाएंगे। अभी कर्मचारियों और पेंशनर्स को 12 प्रतिशत डीए-डीआर मिल रहा है। जबकि, पांच प्रतिशत की वृद्धि के आदेश जारी हो गए थे, जिसे बाद में स्थगित कर दिया था। कर्मचारियों को लंबित वार्षिक वेतनवृद्धि देने के साथ अंशदायी पेंशन योजना में राज्यांश 10 से बढ़ाकर 14 करने की घोषणा भी हो सकती है।

रोजगार

रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर की संख्या बढ़ाने की घोषणा बजट में प्रस्तावित है। इसमें कृषि स्नातक और कृषक पुत्रों को प्राथमिकता मिलेगी। वहीं, मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजनाओं को नए स्वरूप में प्रस्तुत किया जाएगा। महिला स्व-सहायता समूह का विस्तार, कृषक उत्पादक समूहों का गठन, सहकारी समितियों से युवाओं को जोड़ने सहित अन्य कार्यक्रमों के लिए बजट में प्रविधान किया जा सकता है।

आर्थिक प्रबंधन पर जोर

बजट में सरकार का जोर आर्थिक प्रबंधन पर रहेगा। कोरोना की वजह से प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आय के अतिरिक्त विकल्प जुटाने के प्रयास तेज होंगे। नया कर लगाने की संभावना नहीं है। इसके लिए सड़क परिवहन निगम, राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक सहित अन्य संस्थाओं की अनुपयोगी संपत्तियों को नीलाम करके राशि जुटाई जाएगी। बकाया कर वसूली के लिए समाधान योजना लाने के साथ कर चुकाने वाले उपभोक्ताओं के लिए भामाशाह योजना फिर से लागू होगी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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