Madhya Pradesh by elections रवींद्र कैलासिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में 24 विधानसभा सीटों के उपचुनाव से पहले कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ और दिग्विजय सिंह खेमों के बीच बंट गई है। सरकार गिरने से दोनों नेताओं के बीच बढ़ी दूरियों की ताजा वजह चौधरी राकेश सिंह की कांग्रेस में वापसी बन गई है। अब दोनों नेता और उनके समर्थक आमने-सामने आने लगे हैं।

इस कारण कांग्रेस को उपचुनाव में टिकट वितरण में दिक्कतें आ सकती हैं। सरकार गिरने के बाद कमल नाथ और दिग्विजय सिंह में दूरियां बनने लगी थीं। कोरोना लॉकडाउन में दिग्विजय भोपाल में जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर खाना-राशन बांट रहे थे, लेकिन कमल नाथ से मिलने नहीं पहुंचे।

कमल नाथ बंगले में जिन पार्टी नेताओं के साथ बैठकें कर रहे थे, उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नर्मदाप्रसाद प्रजापति, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, संगठन के पदाधिकारी राजीव सिंह, प्रकाश जैन प्रमुख नाम हैं। इसके बाद कमल नाथ ने साफगोई से मीडिया के कुछ लोगों के बीच सरकार गिरने की वजह दिग्विजय द्वारा ज्यादा भरोसे में रखना बता दिया, लेकिन इसके राजनीतिक परिणामों को देखते हुए कुछ घंटे बाद ही वे इससे मुकर भी गए थे।

दिग्विजय का अकेलापन गोविंद-अजय ने दूर किया

ऐसे में दिग्विजय के अकेलेपन को दूर करने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ. गोविंद सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और कुछ अन्य नेता आगे आए। अजय सिंह ने दिग्विजय को साथ लेकर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने वाले चौधरी राकेश सिंह को भिंड के मेहगांव से टिकट दिलाने की कोशिशों को रोक दिया है।

भिंड के ताकतवर नेता डॉ. गोविंद सिंह भी राकेश सिंह के खिलाफ हो गए हैं। वहीं, दिग्विजय सिंह को अलग-थलग देखकर उनके भाई लक्ष्मण सिंह भी उनके समर्थन में दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, राकेश सिंह अभी तकनीकी रूप से कांग्रेस के सदस्य नहीं हैं। उनकी सदस्यता अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के माध्यम से होनी है।

राकेश सिंह की वजह से गुड्डू की एंट्री में देरी राकेश सिंह के टिकट को लेकर मचे घमासान से मालवा के पूर्व कांग्रेस नेता प्रेमचंद गुड्डू की भी पार्टी में एंट्री में देरी होती दिख रही है। हालांकि, गुड्डू के मामले में कमल नाथ के समर्थक पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने शुरुआत में विरोध किया था, लेकिन अब उनके तेवर नरम पड़ गए हैं।

इससे उन्हें इंदौर की सांवेर सीट के उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने की केवल औपचारिकताएं शेष है। गुड्डू मूलतः अर्जुन सिंह समर्थक थे तो दिग्विजय-अजय के करीबी हो गए हैं। गौरतलब है कि गुड्डू विधानसभा चुनाव के समय भाजपा में चले गए थे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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