Madhya Pradesh Cabinet Expansion : धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल।नवदुनिया। कांग्रेस छोड़कर आए पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके 22 समर्थकों के साथ सत्ता संतुलन साधने में भाजपा का सामाजिक और भौगोलिक गणित बिगड़ गया । विधानसभा की 24 सीटोें पर होने वाले उपचुनाव को देखते हुए मंत्रिमंडल में चंबल-ग्वालियर का पलड़ा तो भारी हो गया लेकिन 2018 में भाजपा को जीत दिलाने वाले विंध्य और महाकोशल नेतृत्व की दृष्टि से लगभग साफ हो गया । विंध्य में कुल सीट 30 हैं,जिनमें से 24 पर भाजपा को विजय मिली पर मंत्री मात्र दो मिले ।

महाकोशल की 38 सीटों में से पिछले विधानसभा चुनाव में 13 सीट भाजपा को मिली थी,जिसके चलते मात्र एक रामकिशोर कांवरे को मंत्री बनाया गया । संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर से जहां कमलनाथ सरकार में दो दो मंत्री हुआ करते थे,वहां से किसी को नहीं चुना ।

जबलपुर के साथ रीवा और शहडोल संभाग से भी एक-एक मंत्री ही बनाया गया ।वहीं चंबल और ग्वालियर संभाग को देखें तो वहां से सर्वाधिक 12 मंत्री शिवराज सरकार में हैं । जातीय समीकरण के नजरिए से भी देखा जाए तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में सवर्णों के बीच संतुलन नहीं बन पाया । ठाकुर वर्ग के लगभग दर्जन भर मंत्री हो गए,वहीं ब्राह्मण वर्ग को मात्र दो मंत्री ही मिल पाए । इसके अलावा वैश्य,सिंधी, लोधी, जाटव,पंवार सहित कई जातियों को प्रतिनिधित्व ही नहीं मिल पाया ।

क्षत्रिय-ब्राह्मण का बिगड़ा समीकरण

शिवराज सरकार में अब कुल नौ क्षत्रिय (ठाकुर)मंत्री बनाए गए हैं ।जबकि ब्राह्मणों में मात्र तीन को मौका मिला है। जो क्षत्रिय मंत्री हैं,उनमें से सिंधिया खेमे के गोविंद सिंह राजपूत,प्रद्युम्न सिंह तोमर,राजवर्द्धन सिंह दत्तीगांव,महेंद्र सिंह सिसौदिया,ओपीएस भदौरिया शामिल हैं ।इधर भाजपा के कोटे से भूपेंद्र सिंह,अरविंद भदौरिया,बृजेंद्र प्रताप सिंह,ऊषा ठाकुर सहित चार शामिल हैं ।ब्राह्मण वर्ग से मात्र तीन ही मंत्री मिले हैं । गोपाल भार्गव,नरोत्तम मिश्रा और सिंधिया के साथ आए गिर्राज डण्डोतिया के नाम शामिल हैं ।

अजा-जजा और ओबीसी से बढ़ा प्रतिनिधित्व

शिवराज की पिछली सरकार की तुलना में देखा जाए तो इस बार अनुसूचित जाति,जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच प्रतिनिधित्व बढ़ा है। अजा और जजा कोटे से चार-चार और ओबीसी कोट से 9 मत्री शामिल किए गए हैं । सामान्य वर्ग से 17 मंत्री यानी सीधा-सीधा पचास फीसद हिस्सेदारी मिली है। अल्पसंख्यक वर्ग से भी देखा जाए तो ओपी सकलेचा और हरदीप सिंह डंग को नेतृत्व मिला है।

बसपा से आकर बने दो मंत्री

बहुजन समाज पार्टी से आकर भाजपा से चुनाव लड़ने वाले राम खेलावन पटेल को भी मंत्री बनाया गया है। पटेल 2013 में भाजपा से चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे,उसके बाद वे हार्दिक पटेल के संपर्क में भी रहे । वहीं और गिर्राज डंण्डोतिया बसपा से विधायक रह चुके हैं । पिछला चुनाव 2018 में उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर जीता था और इस्तीफा देकर अब भाजपा में आ गए हैं ।

विंध्य में हो सकता है नुकसान

भाजपा को एकतरफा जीत दिलाने वाले विंध्य क्षेत्र के विधायक नाराज हैं । 30 विधानसभा सीटों वाले इलाके में ज्यादातर विधायक नाराज हैं । गिरीश गौतम , केदार शुक्ला नागेंद्र सिंह नागौद सहित कई अन्य दावेदार थे ।

नागेंद्र सिंह गुड़ और जुगलकिशोर बागरी का तो राज्यसभा चुनाव में वोट निरस्त हो गया था,जिसे नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा था । अब दबी चुबान में कई विधायक कह रहे हैं कि कांग्रेस को जो नुकसान चंबल ग्वालियर में झेलना पड़ा,भाजपा को वही नुकसान विंध्य से उठाना पड़ सकता है।

कई दिग्गजों के समर्थक बाहर

मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा के ही कई दिग्गज नेताओं के समर्थक मंत्री नहीं बन पाए । राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के खास माने जाने वाले रमेश मेंदौला को लेकर आखिरी दौर तक कयास लगाए जाते रहे लेकिन परिणाम सिफर रहा ।

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का भी एकमात्र समर्थक भारत सिंह कुशवाह की इंट्री जातिगत समीकरणों के चलते हुई। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के समर्थक लोधी जाति के विधायकों में से भी किसी को मौका नहीं मिला ।

केंद्रीय मंत्री थावर चंद गेहलौत और फग्गन सिंह कुलस्ते की सिफारिश पर भी पार्टी ने गौर नहीं किया । वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी इस विस्तार में सर्वाधिक नुकसान झेलना पड़ा है। उनके मात्र चार समर्थक ही मंत्री बन पाए हैं । वहीं भाजपा संगठन और यूं कहें प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत की जोड़ी कैबिनेट में अपने समर्थकों का वर्चस्व बनाने में कामयाब रही ।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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