भोपाल। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष को लेकर झाबुआ उपचुनाव के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि पीसीसी अध्यक्ष को लेकर चल रही कवायद अब नए सिरे से शुरू हुई है। प्रदेश के दिग्गज नेताओं के बीच किसी नाम को लेकर एकराय नहीं बन पाने से हाईकमान के निर्देश पर एआईसीसी महासचिव व प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने फिर तीन दिन के प्रवास में विभिन्न् अंचल से आए नेताओं से मुलाकात की है।

इससे आदिवासी नेताओं के अलावा मीनाक्षी नटराजन का नाम तेजी से नए पीसीसी अध्यक्ष के लिए सामने आया है। नए पीसीसी अध्यक्ष के लिए अब तक पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कमलनाथ सरकार के मंत्रियों बाला बच्चन, उमंग सिंघार, ओमकार सिंह मरकाम जैसे आदिवासी नेताओं व ओबीसी से आने वाले मंत्री जीतू पटवारी और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के नाम चर्चा में आए थे।

हालांकि इन नामों को लेकर प्रदेश के दिग्गज नेताओं में एकराय नहीं बन पाई। चर्चा में आए नामों में सिंधिया को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदेश के मंत्रियों, अजय सिंह व अन्य नेताओं के साथ मुलाकात की। इसी तरह उमंग सिंघार और दिग्विजय सिंह विवाद से उनका नाम भी दौड़ से बाहर हो गया।

वहीं, हाईकमान के पीसीसी गठन में एक व्यक्ति-एक पद के फार्मूले को लागू किए जाने से अन्य मंत्रियों के पीसीसी अध्यक्ष बनने की संभावना समाप्त हो जाएंगी। वे अपने समर्थक नेताओं के सहारे मंत्री पद को कायम करने पर ज्यादा जोर देंगे।

मौजूदा पीसीसी में मंत्री बच्चन और पटवारी कार्यकारी अध्यक्ष हैं मगर नई पीसीसी में वे इन पद को छोड़ देंगे। हालांकि सरकार के लिए बच्चन सबसे उपयुक्त पीसीसी अध्यक्ष साबित हो सकते हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री कमलनाथ के सबसे विश्वस्त साथी हैं। मगर मंत्रिमंडल गृह मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने के लिए उनके जैसा विश्वस्त मंत्री या विधायक नाथ के पास नहीं है।

बाबरिया चाहते थे नटराजन पदयात्राएं कर प्रदेश घूमें

सूत्र बताते हैं कि हाईकमान को सिंधिया विरोधियों ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को पीसीसी अध्यक्ष बनाने का दांव खेला है। नटराजन के पक्ष में प्रभारी प्रदेश महासचिव बाबरिया का भी झुकाव दिखाई देता है।

बाबरिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से गांधी जयंती कार्यक्रम के नाम पर नटराजन को एक राज्य स्तरीय समिति बनाने का सुझाव भी दिया है। वे चाहते थे कि इस समिति को गांधी जयंती के कार्यक्रमों के तहत प्रदेश में पदयात्राएं करने का दायित्व सौंपा जाए। इसके पीछे कारण माना जा रहा था कि वे पीसीसी अध्यक्ष बनने के पहले एक बार प्रदेश का दौरा कर लें।

झाबुआ उपचुनाव के बाद फैसला

पीसीसी अध्यक्ष का फैसला झाबुआ उपचुनाव के बाद हो जाएगा। नई पीसीसी में एक व्यक्ति-एक पद की व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा।

- दीपक बाबरिया, महासचिव एआईसीसी व प्रदेश प्रभारी