Madhya Pradesh भोपाल। कर्मचारी बीमा योजना में सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने ही निर्देशों को ताक पर रख दिया है। इसके तहत यदि कर्मचारियों के तीन बच्चे भी हैं तो उन्हें योजना का लाभ मिलेगा। विभाग ने योजना के मसौदे में इस शर्त को शामिल किया है। मसौदे की कॉपी नईदुनिया के पास मौजूद है। जबकि इसी निर्देश का उल्लंघन करने पर वर्ष 2016 में दमोह जिला अदालत के तीन भृत्यों को नौकरी से बर्खास्त किया गया था। वर्ष 2017 में इस निर्देश के खिलाफ कर्मचारियों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया और यह नियम राजनेताओं पर भी लागू करने की मांग की थी।

राज्य सरकार कर्मचारियों की काफी पुरानी मांग पूरी करने के लिए कर्मचारी बीमा योजना ला रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने योजना का मसौदा तैयार किया है। इस मसौदे पर पिछले दिनों सभी मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों से जीएडी के अफसरों ने चर्चा की है। इस बैठक में रखे गए मसौदे में योजना के लिए उस कर्मचारी को भी पात्र माना गया है, जिसके तीन बच्चे हैं। 25 साल से कम उम्र के बच्चे और आश्रित माता-पिता को भी सरकार योजना का लाभ देगी। योजना को लेकर सरकार के इस मसौदे ने नई बहस छेड़ दी है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले कर्मचारियों के लिए बीमा योजना शुरू करने का भरोसा दिलाया था। इसी कड़ी में यह कवायद की जा रही है।

राज्य सरकार ने 26 जनवरी 2001 को जनसंख्या नियंत्रण कानून के तहत निर्देश जारी किए थे। निर्देशों में स्पष्ट उल्लेख है कि दो से अधिक बच्चे होने (जीवित होने) पर सरकारी कर्मचारी नौकरी के लिए अपात्र माने जाएंगे और उन्हें सेवा से पृथक किया जा सकेगा। ऐसे मामलों में सरकार मप्र सिविल सर्विसेज रूल्स 1961 की धारा 6(6) के तहत कर्मचारी को बर्खास्त कर सकती है। दमोह जिला अदालत के तीनों भृत्यों को इसी नियम का उल्लंघन करने पर बर्खास्त किया गया था। हालांकि सरकार इस नियम के तहत दो बच्चों के बाद परिवार नियोजन अपनाने वाले सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को दिए जाने वाले विशेष इंक्रीमेंट को बंद कर चुकी है। इस मामले में अफसरों का मानना था कि परिवार नियोजन को लेकर लोगों में जागरुकता आई है, इसलिए अब विशेष छूट देने की जरूरत नहीं है।

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