भोपाल। मध्यप्रदेश में सतना, सिवनी और छतरपुर में मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने नए सिरे से कवायद शुरू कर दी है। तीनों मेडिकल कालेज को राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के एक साल बाद भी जमीन पर प्रगति नहीं हो पाई। अब विभाग फिर से एस्टीमेट बनाने में जुटा है, टेंडरों में गड़बड़ी सामने आने के बाद ही यह प्रक्रिया फिर शुरू की गई है।

छतरपुर मेडिकल कॉलेज की चिन्हित जमीन को लेकर भी विवाद की स्थिति सामने आई है, मामले में प्रतिवादी पार्टी कोर्ट से स्थगन ले आई है। अगस्त 2018 में तत्कालीन भाजपा सरकार की मंत्रिपरिषद ने छतरपुर, सिवनी और सतना में मेडिकल कॉलेज खोलने का एलान किया था। एक साल बाद भी इन तीनों कॉलेज भवन निर्माण को लेकर बात आगे नहीं बढ़ पाई। लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) अब नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया शुरू करने की कवायद में जुटी है।

तीनों मेडिकल कॉलेज प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत खुलना थे, जिसमें निर्माण व उपकरण का 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य सरकार को देना था। शासन ने एक कॉलेज को तैयार करने के लिए 300 करोड़ रुपए का बजट तय किया था।

इस तरह करीब 900 करोड़ रुपए से तीनों कॉलेज तैयार होते, इसमें 40 फीसदी राशि राज्य सरकार को मिलानी थी। विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में सरकार बदलते ही मामला वहीं थम गया। तीनों कॉलेज के भवनों के निर्माण का जिम्मा पीआईयू का था।

भवन निर्माण के लिए दो साल का समय रखा गया था, लेकिन एक साल यूं ही निकल गया। मौजूदा सरकार ने तीनों मेडिकल कॉलेज के टेंडर में गड़बड़ी पाए जाने के बाद उन्हें निरस्त कर दिया है। बताया जाता है कि कीमतें ज्यादा आने के चलते यह कार्रवाई की गई है।

सिवनी के लिए फिर से एस्टीमेट बनाया जा रहा है। सतना, सिवनी और छतरपुर में भवन के लिए जमीनें चिन्हित हो चुकी हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जल्दी ही दोबारा टेंडर लगाने की कार्रवाई की जाएगी।

छतरपुर विधायक ललिता यादव ने मेडिकल कॉलेज के प्रोजेक्ट में विलंब करने के लिए कमलनाथ सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने इन तीनों कॉलेजों को मंजूरी दी थी, लेकिन मौजूदा सरकार जानबूझकर इन्हें लेट कर रही है। यही वजह है कि कॉलेज भवन के लिए बजट में आवंटन भी नहीं किया गया। ऽ