भोपाल, नसरुल्लागंजभारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पिता प्रेमसिंह चौहान का आज उपचार के दौरान निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे। उनके निधन पर भाजपा के अनेक नेताओं ने शोक व्‍यक्‍त किया है। मुख्‍यमंत्री कमलनाथ और भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष राकेश सिंह ने ट्वीट कर अपनी श्रद्धांज‍लि अर्पित की है। अंतिम संस्‍कार गृह ग्राम जैत में कल किया जाएगा।

उल्‍लेखनीय है‍ कि शिवराज के पिता कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। एक दिन पहले ही उन्हें उपचार के लिए भोपाल से मुंबई भेजा गया था। उन्‍होंने मुंबई के लीलावती अस्‍पताल में अंतिम सांस ली। पिता के देहावसान की खबर मिलते ही शिवराज सिंह मुंबई रवाना हो गए। शिवराज ने भोपाल में आज भाजपा की जीत पर मीडिया को संबोधित किया था। बताया जाता है कि इसी दौरान उन्‍हें यह दुखद समाचार मिला।

श्री चौहान धार्मिक प्रवृत्ति के व्‍यक्ति थे। वे सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रियता से शामिल होते थे। उज्‍जैन के महाकाल मंदिर के साथ ही इंदौर के समीप सांवर में उल्‍टे हनुमान मंदिर में भी प्रमुख अवसरों पर वे दर्शनों के लिए पहुंचते थे।

नसरुल्लागंज प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में बाबूजी के नाम से प्रसिद्ध 84 वर्षीय प्रेम सिंह चौहान अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़कर गए हैं। उनके सबसे बड़े पुत्र शिवराज सिंह चौहान हैं। इसके बाद पुत्री शशि महेश पटेल, नरेंद्र सिंह चौहान, रोहित सिंह चौहान, वरुण सिंह चौहान हैं ।

जैसे ही उनके निधन का समाचार मिला तो क्षेत्र सहित संपूर्ण मध्यप्रदेश में शोक की लहर छा गई। श्री चौहान अपने पिता की पार्थिव देह लेकर देर रात को भोपाल पहुंचेंगे और सुबह 9:00 बजे तक 224/9 बी साकेत नगर भोपाल स्थित उनके निवास पर पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए रखी जाएगी। इसके बाद उन्हें जैत ले जाया जाएगा यहां शाम 4:00 बजे नर्मदा तट पर उनका अंतिम संस्कार होगा।

साधारण परिवार में जन्मे किसान थे बाबूजी

प्रेम सिंह चौहान बाबूजी साधारण परिवार में जन्मे किसान थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन एक साधारण व्यक्ति की भांति ही जिया। पूर्व वन विकास निगम अध्यक्ष गुरु प्रसाद शर्मा ने उनकी जीवनी के बारे में बताया कि वह हमेशा साधारण रहे और उनके मन में इस बात का कोई दंभ नहीं रहता था कि वह एक मुख्यमंत्री के पिता हैं। वह हमेशा जहां पर भी जाते साधारण नागरिक की तरह लोगों से मिलते थे। उन्होंने आखिरी समय तक भी अपना गांव नहीं छोड़ा था तथा भोपाल में रहने के बावजूद भी गांव में उनका आना-जाना लगा रहता था।

Posted By: Hemant Upadhyay

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