भोपाल। कमलनाथ सरकार बिजली के मुद्दे पर राज्य में चल रही सियासत को लेकर बेहद सतर्क है। बिजली कंपनियों के कॉल सेंटर के माध्यम से सरकार प्रतिदिन 500 लोगों का फीडबैक जुटा रही है, ताकि उन लोगों से बिजली की उपलब्धता और कटौती की वास्तविक जानकारी मिल सके।

यह निर्देश खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिए हैं। इसकी वजह साफ है कि भारतीय जनता पार्टी लगातार बिजली के मुद्दे को उठा रही है और प्रचारित कर रही है कि कांग्रेस सरकार आते ही बिजली का रोना शुरू हो गया है। सरकार ने बिजली की आपूर्ति में गड़बड़ी रोकने के उद्देश्य से एक ही स्थान पर पांच साल से जमे अफसरों के भी थोकबंद तबादले कर दिए हैं।

लोकसभा चुनाव के पहले से ही प्रदेश में बिजली कटौती का मुद्दा छाया हुआ है। भाजपा का आरोप है कि लगातार हो रही बिजली कटौती से सूबे के लोग अभी भी परेशान हैं। पार्टी ने इसे मुद्दा बनाते हुए सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन भी किया। भाजपा ने पूरे प्रदेश में लालटेन यात्रा निकालकर बिजली कटौती पर विरोध भी जताया था।

इसके बाद से ही कमलनाथ सरकार बिजली की आपूर्ति पर सतत निगरानी रख रही है और बिजली पर आम लोगों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है। ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालय सहित कई जिलों का दौरा कर बिजलीकर्मियों से बातचीत की, वितरण संबंधी समस्याओं को चिन्हित करने के बाद उनका निराकरण किया।

अब सरकार ने बिजली कंपनियों के कॉल सेंटर्स को निर्देश दिए है कि वह प्रतिदिन 500 उपभोक्ताओं से बातचीत कर फीडबैक लें कि क्या उन्हें बिजली संबंधी कोई शिकायत है। उन्हें बिजली की आपूर्ति नियमित मिल रही है या नहीं। 24 घंटे में कितने बार बिजली गई। बिल उन्हें ज्यादा राशि के तो नहीं मिल रहे। ऐसे तमाम सवालों की प्रश्नावली के साथ कॉल सेंटर्स द्वारा उपभोक्ताओं से जानकारी ली जाएगी।

पंचायत और इंटेलीजेंस से भी लिया जा रहा फीडबैक

बिजली आपूर्ति की सही जानकारी पाने के लिए कमलनाथ सरकार इंटेलीजेंस से लेकर पंचायत तक की इकाई का भी सहयोग ले रही है। पंचायत सचिवों को प्रतिदिन जनपद स्तर पर बिजली आपूर्ति की जानकारी देनी पड़ती है। जनपद पंचायत ये जानकारी एकत्र कर कलेक्टर को भेज रहे हैं। ये कवायद सिर्फ इसलिए है कि विपक्षी दल भाजपा को बिजली का मुद्दा बनाने का मौका न मिल सके।

Posted By: Hemant Upadhyay

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