मोहम्मद रफीक, भोपाल। अफीम उत्पादक राज्य होने के कारण प्रदेश में अफीम और इससे संबंधित नशे के प्रकरण दर्ज होते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में यहां केमिकल ड्रग्स का चलन बढ़ा है। 2020 के 11 महीनों (जनवरी- नवंबर) में इससे संबंधित 193 प्रकरण दर्ज किए गए, जबकि 2019 में इनकी संख्या 81 ही थी। आधिकारिक आंकड़ों में केमिकल ड्रग्स की जो मात्रा पकड़ी गई, वह भी साबित करती है कि प्रदेश में ड्रग्स माफिया ने पैठ बना ली है। 2019 में इनसे सवा लाख नग (वायल) से अधिक ड्रग्स मिली थी तो बीते वर्ष में यह आंकड़ा चार लाख नग तक पहुंच गया।

हाल ही में प्रदेश में कई जगह ड्रग्स माफिया के पकड़ में आने के बाद यह राजफाश हुआ है कि युवाओं को इस नशे का आदी बनाया जा रहा है। प्रदेश के बड़े शहर माफिया के निशाने पर हैं। वर्ष 2020 में जनवरी से नवंबर तक नारकोटिक्स विभाग की ओर से की गई कार्रवाई में अफीम, गांजा और डोडाचूरा बड़ी मात्रा में जब्त किया गया। सबसे अधिक चौंकाने वाले आंकड़े केमिकल ड्रग्स के रहे।

सूत्रों का कहना है कि केमिकल ड्रग्स की सबसे अधिक खपत भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में है। यहां हुक्का बार आदि में आने वाले युवाओं को इसकी लत लगाई जा रही है। पुलिस की ओर से इस मामले में की गई कार्रवाई का आंकड़ा भले ही पिछले साल की तुलना में बढ़ा हो, लेकिन कई मामले कागजों में दर्ज नहीं हुए हैं। केमिकल ड्रग शारीरिक और मानसिक तौर पर खोखला कर देता है। यह किडनी-लीवर को नुकसान पहुंचाने के साथ सोचने-समझने की क्षमता खत्म करता है। इस संबंध में विभाग के पुलिस अधिकारियों ने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।

दर्ज प्रकरणों की जानकारी (वर्ष 2019)

नशीले पदार्थ प्रकरण मात्रा आरोपित

स्मैक 367 13 किलो 467

अफीम 81 173 किलो 136

गांजा 2571 11 हजार किलो 3062

केमिकल ड्रग्स 81 1 लाख 33 हजार नग 137

(वर्ष 2020- जनवरी से नवंबर)

स्मैक 173 8 किलो 224

अफीम 84 330 किलो 127

गांजा 1906 15 हजार किलो 2351

केमिकल ड्रग्स 193 चार लाख नग 347

15 शहरों में चल रहा है नशा मुक्ति अभियान

गौरतलब है कि वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने एम्स की मदद से देशभर में नशे की स्थिति पर सर्वे कराया था। इसमें प्रदेश के 15 श्ाहरों में नशामुक्ति अभियान की आवश्यकता बताई गई थी। इसके तहत रीवा, जबलपुर, भोपाल, छिंदवाड़ा, ग्वालियर, नीमच, इंदौर, उज्जैन, दतिया, होशंगाबाद, मंदसौर, नरसिंहपुर, रतलाम, सागर और सतना में 15 अगस्त 2020 से नशा मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 31 मार्च 2021 तक जारी रहेगा। सामाजिक न्याय विभाग की ओर से भी प्रदेश में 20 नशामुक्ति सह पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष इन केंद्रों में 3259 लोगों को नशे की लत से मुक्त कराया गया।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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