वैभव श्रीधर, भोपाल। प्रदेश में 16 साल बाद फिर जिला सरकार मॉडल की वापसी हो रही है। कमलनाथ सरकार बदली हुई परिस्थितियों के हिसाब से इसे संशोधनों के साथ लागू करेगी। इसमें हर ब्लॉक को अलग से विकास के लिए फंड मिलेगा। जिले के भीतर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले के अधिकार भी जिला सरकार को होंगे। जिला योजना समिति का आकार बढ़ाकर इसे और पॉवरफुल बनाया जाएगा।

योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के मसौदे को सामान्य प्रशासन विभाग की हरी झंडी के बाद कैबिनेट में रखने का प्रस्ताव भेज दिया गया है। योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग ने कमलनाथ की जिले का काम जिले में होने संबंधी मंशा को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव तैयार किया है। व्यवस्था लागू होने के बाद प्रभारी मंत्री पॉवरफुल हो जाएंगे। जिलों में न उनकी पूछपरख बढ़ेगी, वे मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर काम करेंग

जिला सरकार में ये काम होंगे

-जिले से संबंधित हर छोटे-बड़े निर्णय लिए जाएंगे।

-साल में एक बार जिले के विकास की पूरी योजना बनेगी।

- दो करोड़ रुपए तक के बड़े कामों की मंजूरी का अधिकार।

-तृतीय, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले जिले में ही हो जाएंगे।

- जनप्रतिनिधियों की शिकवा, शिकायतों का निराकरण होगा।

- विधायक, जिला व जनपद पंचायत के साथ नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों की सुनवाई न होने की आपत्ति का निराकरण भी होगा।

दिग्विजय सिंह ने किया था लागू

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने दोनों कार्यकाल (वर्ष 1993 से 2003) में सत्ता का विकेंद्रीकरण किया था। पहले कार्यकाल में उन्होंने संविधान संशोधन के बाद त्रिस्तरीय पंचायतराज और स्थानीय निकाय चुनाव व्यवस्था लागू की। 1998 में कांग्रेस के सत्ता में वापसी का बड़ा आधार इसे ही माना जाता है। दूसरे कार्यकाल में उन्होंने जिला सरकार मॉडल लागू किया।