भोपाल। राजधानी में मेट्रो की तैयारी बीते 10 साल से जारी है। इतने लंबे वक्त के बाद भी सरकार मेट्रो को पटरी पर लाने में नाकाम रही। इधर, रविवार को नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह ने विधानसभा में सीहोर, मंडीदीप व औबेदुल्लागंज तक मेट्रो चलाने की नई घोषणा की। यदि आज से ही इसकी तैयारी शुरू कर दी जाए तो 2033 तक यह प्रोजेक्ट चलेगा। सीहोर-औबेदुल्लागंज तक मेट्रो पहुंचाने के लिए करीब 80 किमी का कॉरीडोर बनाना होगा, जो अपने आप में बहुत खर्चीला प्रोजेक्ट है। दरअसल, पिछली प्रदेश सरकार ने भी मंडीदीप व सीहोर तक लाइट मेट्रो चलाने के लिए प्लानिंग की थी।

अक्टूबर 2014 में अंतरिम रिपोर्ट तैयार कर जर्मन कंपनी ने सरकार को इसकी रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन फंडिंग व मेट्रो प्रोजेक्ट में देरी को देखते हुए मंडीदीप व सीहोर तक मेट्रो चलाने के विचार पर अमल नहीं हुआ।

अब नए सिरे से होगी शुरुआत

अधिकारियों ने बताया कि तीनों स्थानों तक मेट्रो के लिए अब नए सिरे से मेट्रो को लेकर प्लानिंग होगी। तीनोें स्थानों पर परीक्षण के दौरान यहां की आबादी, जनसंख्या घनत्व, वाहनों की संख्या व यात्रियों के आवागमन संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद प्री-फिजिबिलिटी टेस्ट में यह देखा जाएगा कि जहां से मेट्रो निकलनी है, वहां कितने लोगों को इसका फायदा मिलेगा।

दो रूट की अलग से बनेगी डीपीआर

सरकार मेट्रो के दो नए रूट बनाने की बात कर रही है। इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि मंडीदीप व औबेदुल्लागंज को एम्स मेट्रो कॉरीडोर से जोड़ा जा सकता है। यदि फिजिबिलिटी टेस्ट के बाद सीहोर तक मेट्रो को चलाने को मंजूरी मिली तो सिंधी कॉलोनी, नादरा बस स्टैंड या भारत टॉकीज तक इसे जोड़ा जाएगा। इससे बैरागढ़ को भी फायदा मिलेगा।

अभी 15 हजार से ज्यादा लोग करते हैं अप-डाउन, 2033 तक संख्या बढ़ेगी

परिवहन सेवाओं से जुड़े जानकार बताते हैं कि भोपाल से मंडीदीप, औबेदुल्लागंज और सीहोर तक करीब 15 हजार लोग अपडाउन करते हैं। शहरीकरण को देखते हुए ऐसे लोगों की संख्या 2033 तक और बढ़ जाएगी। अगले 15 साल में यह संख्या तीन गुना बढ़ सकती है।

मौजूदा प्रोजेक्ट के हालात, 2022 तक मेट्रो का सफर मुश्किल

राज्य सरकार ने पांच में से सिर्फ दो रूटों पर मेट्रो शुरू करने का निर्णय लिया है। बजट में इंदौर और भोपाल मेट्रो के लिए सिर्फ 100 करोड़ रुपए दिए हैं। दावा है कि तीन साल के अंदर सेवा शुरू कर दी जाएगी। 2022 तक मेट्रो सेवा शुरू हो पाना संभव नहीं है। सिविल वर्क के बाद भूमिगत कार्य में दो साल से ज्यादा लगेगा। उधर, भदभदा से रत्नागिरी तिराहे तक निर्माण के लिए तैयारी पूरी नहीं हो सकी।

फंड बड़ी चुनौती

जानकारों का मानना है कि सीहोर, मंडीदीप व औबेदुल्लागंज तक सरकार को वर्तमान प्रोजेक्ट से अधिक राशि की जरूरत होगी। इस पर करीब 7 हजार करोड़ का खर्च आएगा। समय के साथ लागत बढ़ती जाएगी।

मोनो रेल पर निर्णय नहीं

भोपाल से तीन शहरों को जोड़ने की कवायद में सरकार ने मेट्रो, मोनो और अन्य हाईस्पीड ट्रेन तीनों का ही विकल्प खुला रखा है। यह टेस्ट के बाद तय होगा कि कौन सी ट्रेन चलेगी।

विधायक बोले, वेयरहाउसिंग के इंजीनियर मेट्रो खड़ी कर रहे हैं

खरगौन से विधायक रवि जोशी ने मेट्रो कंपनी के प्रमुख अभियंता जितेंद्र दुबे पर बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि शिवराज सिंह ने जिस मेट्रो की कल्पना की थी, उसमें वेयरहाउसिंग के इंजीनियर को जिम्मेदारी दी गई। ऐसे में भोपाल की मेट्रो का हाल क्या होगा, सभी समझ सकते हैं। जब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी उनसे कहा था कि तुम्हारा यहां कोई काम नहीं है, अगली बैठक से पहले कोई योग्य व्यक्ति यहां आ जाएगा।

तीन स्थानों पर मेट्रो चलाने के लिए प्लानिंग की है। प्री-फिजिबिलिटी टेस्ट कराया जा रहा है। इसके बाद मेट्रो प्रोजेक्ट में नए रूट को लेकर डीपीआर संबंधित प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें चार-पाच साल का समय लगेगा। यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 15साल लंबा है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसकी योजना तैयार की जा रही है।

- जयवर्धन सिंह, नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्री, मप्र शासन

भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां मेट्रो की जरूरत नहीं है। परिवहन की सेवाओं को दुरुस्त किया जाना चाहिए। शहर के व्यवस्थित विकास के लिए प्लानिंग बेहद जरूरी है। मेट्रो के अलावा भी कई ऐसे माध्यम हैं, जिनसे बेहतर सुविधाएं लोगों को दी जा सकती हैं। सिर्फ मेट्रो ही सुविधा का एक मात्र विकल्प नहीं है।

- बीके चुघ, रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल, सीपीडब्ल्यूडी (दिल्ली)

यह रीजनल प्लानिंग का ही हिस्सा है। एक शहर से दूसरे शहर को जोड़ने के लिए यह पहल अच्छी है। मेट्रो प्रोजेक्ट आने से इन क्षेत्रों में डेवलपमेंट भी बढ़ेगा। यहां मेट्रो के पुराने रूट को पूरा करने के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

- कमल राठी, अर्बन एक्सपर्ट