भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि। Madhya Pradesh News सरकारी स्कूलों को विदेश की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी चल रही है, लेकिन स्कूलों में संसाधन की कमी है। सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरी ही नहीं है। कहीं-कहीं लाइब्रेरी के नाम पर एक छोटा सा कमरा है। प्रदेश भर में करीब 9 हजार हायर सेकंडरी स्कूलों में सिर्फ 10 में लाइब्रेरियन हैं। स्कूलों में करीब 24 साल से लाइब्रेरियन की भर्ती ही नहीं हुई है। वहीं, प्रदेश के करीब 11 हजार स्कूलों में लाइब्रेरी नहीं है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सभी वर्ग के लिए 1982 में लाइब्रेरियन की भर्ती हुई थी।

इसके बाद 1995 में अनूसूचित जनजाति लाइब्रेरियन की भर्ती हुई थी। जिन स्कूलों में लाइब्रेरियन के पद खाली हुए, वहां पर दोबारा भर्र्ती नहीं हुई। राजधानी में 131 हाई व हायर सेकंडरी सरकारी स्कूल हैं, लेकिन इनमें लाइब्रेरियन नहीं हैं।

वहीं, अभी तक स्कूल शिक्षा विभाग ने पुस्तकालय अधिनियम भी लागू नहीं किया, जबकि प्रारूप तैयार है। ज्ञात हो कि प्रदेश में लगभग एक लाख 11 हजार 231 प्राथमिक व मिडिल और 8 हजार 555 हाई व हायर सेकंडरी स्कूल हैं। इसमें प्रदेश के 10 हजार 763 स्कूलों में पुस्तकालय नहीं है।

संभागीय व जिला पुस्तकालय में लाइब्रेरियन नहीं

प्रदेश में पांच संभागीय पुस्तकालय हैं। इनमें से सिर्फ एक में लाइब्रेरियन है, बाकि जगह प्रभारी के भरोसे काम चल रहा है। वहीं, सभी जिलों के जिला पुस्तकालय में भी लाइब्रेरियन नहीं हैं, सिर्फ सात में हैं। सभी जगह बाबू और शिक्षक के भरोसे लाइब्रेरी के संचालन का काम चल रहा है।

विद्यार्थियों को नहीं मिल पाती किताबें

सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में छात्रों को सिर्फ कोर्स की किताबें ही मिलती हैं। विद्यार्थियों को प्रतियोगिता संबंधित, न्यूज पेपर, मैगजीन व अन्य प्रेरक किताबें पढ़ने के लिए नहीं मिल रही हैं।

इनका कहना है

सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरी की व्यवस्था को जल्द ही ठीक किया जाएगा। लाइब्रेरियन के पद भी भरे जाएंगे।

-डॉ. प्रभुराम चौधरी, स्कूल शिक्षा मंत्री

Posted By: Hemant Upadhyay

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