Madhya Pradesh News: भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि )। प्रदेश के निजी स्कूलों को फीस संबंधी जानकारी अपलोड करनी थी, लेकिन अब तक करीब 17 हजार स्कूलों ने जानकारी नहीं दी है। स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के परिपालन में प्रदेश के निजी स्कूलों द्वारा फीस का ब्यौरा मांगा गया था, लेकिन अब भी 52 फीसद स्कूलों ने जानकारी अपलोड की है। वहीं राजधानी के करीब 57 फीसद ने जानकारी दी है। फीस का ब्यौरा विभाग के शिक्षा पोर्टल पर अपलोड किया जाना है, लेकिन अभी भी 17,870 स्कूलों ने यह जानकारी अपलोड नहीं की है। विभागीय अधिकारी जल्द ही स्कूलों की ओर से ब्यौरा मिलने की बात कह रहे हैं, जबकि कोर्ट द्वारा दिया गया चार सप्ताह का अतिरिक्त समय भी 18 अक्टूबर को समाप्त हो गया है।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा पोर्टल पर 37,284 स्कूलों की सूची डालकर बच्चों से ली गई फीस की जानकारी मांगी गई है, इसमें से अब तक मात्र 19,414 स्कूलों ने ही जानकारी पोर्टल पर डाली है। वहीं भोपाल में दर्ज 1990 स्कूलों में अब तक मात्र 1141 स्कूलों ने ही जानकारी भेजी है। स्कूल शिक्षा विभाग के पोर्टल पर मप्र निजी विद्यालय फीस विनियमन क्रियान्वयन प्रणाली के सेक्शन में 10 अक्टूबर तक पंजीयन के लिए लक्षित स्कूल 51,230 दिखाए जा रहे थे, जबकि 16 हजार 166 स्कूलों ने जानकारी दिया जाना दशार्या था।

इस तरह केवल 31.5 फीसदी स्कूलों ने जानकारी दी थी। वहीं अब 11 अक्टूबर से इसी पोर्टल पर स्कूलों का आंकड़ा अचानक 14,158 घटकर 37,072 दिखा रहा है। पोर्टल के अनुसार इनमें से 19,414 स्कूलों ने जानकारी दी है। इस तरह जानकारी देने वाले स्कूलों का आंकड़ा बढ़कर 52 फीसद हो गया। पोर्टल पर भोपाल में ही 2615 स्कूल दिखाए जा रहे थे, जो अब 1990 हो गए हैं। पालक महासंघ का कहना है पिछले दो सालों से संचालित नहीं हो रहे कुछ स्कूलों के नाम भी पोर्टल पर थे। इससे उन स्कूलों के नाम काटे गए हैं, जहां नामांकन दर्ज नहीं हुए हैं।

राजधानी के स्कूलों पर होगी कार्यवाही

भोपाल जिले के 700 से अधिक स्कूलों के पर जानकारी न भेजने वाले स्कूलों के ऊपर 10 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी नितिन सक्सेना का कहना है कि इन स्कूलों को नोटिस भेजा गया है। नोटिस का जवाब नहीं देने वाले स्कूलों के खिलाफ 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाने की तैयारी चल रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग से निजी स्कूलों द्वारा ली गई फीस का ब्यौरा मांगा था, जो अभी तक 52 फीसद स्कूलों ने ही भेजी है। स्कूलों की संख्या में भी गड़बड़झाला किया गया है। विभाग को जवाब देना चाहिए कि बाकी 14 हजार कहां गए। हम इस मामले को लेकर कोर्ट जाएंगे। -प्रबोध पंड्या महासचिव, पालक महासंघ मप्र

Posted By: Lalit Katariya

NaiDunia Local
NaiDunia Local