भोपाल। नईदुनिया प्रतिनिधि। Madhya Pradesh News मुसीबत में फंसी महिलाओं की सुरक्षा के लिए भोपाल पुलिस कितनी संवेदनशील व सजग है, इसका अंदाजा पुलिस की वेबसाइट पर डिस्पले कर रहे वुमन सेफ्टी ऐप से पता चल जाएगा। दरअसल, सुरक्षा के लिए महिलाएं इसे अपलोड करने की कोशिश करती है तो वह नॉट फाउंड बताता है। वहीं छात्राओं की सुरक्षा को लेकर शुरू की गई 'निर्भया मोबाइल वैन' तो शहर से गायब सी हो गई हैं। इधर, महिला पुलिस का सुरक्षा दस्ता मैत्री और शक्ति स्क्वॉड सुस्त पड़ा है। यह इसलिए भी गंभीर मसला है, क्योंकि पिछले दो साल में दस माह के मुकाबले इस साल दुष्कर्म और छेड़खानी के मामले बढ़ गए हैं। बता दें कि हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या से देशभर में आक्रोश हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

बता दें कि सितंबर 2016 में हबीबगंज स्टेशन के पास छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। तब तत्कालीन डीआईजी ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए वुमन सेफ्टी एप का शुभारंभ किया था। लेकिन, डीआईजी के तबादले के बाद यह एप भोपाल पुलिस की वेबसाइट पर शो-पीस बनकर रह गया है। एप की लिंक पर क्लिक करने पर नॉट फाउंट का मैसेज मिलता है।

पैनिक बटन के साथ सुरक्षा के कई फीचर थे

वुमन सेफ्टी ऐप को सायबर और क्राइम ब्रांच ने मिलकर तैयार किया था। इस एप को डाउनलोड करने के बाद महिला अपना मोबाइल नंबर, नाम और पता दर्ज कराती थीं। ऐप में एक पैनिक बटन दिया गया था। मुसीबत में असुरक्षित महसूस करने महिला द्वारा पैनिक बटन दबाने पर पुलिस कंट्रोल से लेकर महिला के घर के पते संबंधित थाना, एसपी और आला अफसरों के पास मदद के लिए मैसेज पहुंच जाता था। अगर महिला का मोबाइल बंद हो या कोई उसका नेटवर्क बंद कर दे, तब भी पुलिस उसे ट्रेस कर लेती थी। लेकिन अब यह ऐप डाउनलोड ही नहीं हो रहा है।

निर्भया मोबाइल के भी बंद जैसे हालात

दिल्ली में चलती बस में निर्भया कांड के बाद महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए भोपाल पुलिस ने निर्भया मोबाइल वैन शुरू की थी। इस वैन को स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान व महिला छात्रावास के आसपास तैनात करने के निर्देश हैं। शुरू में तो यह नजर आती थी। कई मजनुओं पर इसने लगाम भी लगाई, लेकिन अब यह स्कूल-कॉलेज के पास छात्राओं की सुरक्षा के लिए नजर नहीं आ रही है। पुलिस की वेबसाइट के अनुसार इसकी प्रभारी एसआई नीतू कुंसारिया को बनाया गया है।

मैत्री और शक्ति स्क्वॉड भी नजर नहीं आती

छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए गठित सुरक्षा दस्ते मैत्री मोबाइल और शक्ति स्क्वॉड का गठन किया गया था। इनका काम महिला छात्रावास में पहुंचकर उनकी समस्याएं जानने और वोट क्लब आदि घूमने के स्थानों पर संदिग्ध लोगों से पूछताछ करना है। दल की सदस्य संदिग्धों का नाम और पता भी नोट करना होता है। इन दोनों दस्तों की हालत ही खस्ता है। ये कभी-कभार ही पेट्रोलिंग करते नजर आते हैं।

पीड़ित महिलाएं यहां कर सकती है शिकायत

घरेलू हिंसा, छेड़खानी, पीछा करना, अ्भद्र एसएमएस-एमएमएस-कॉल्स के लिए 'वी फॉर यू" का टोल फ्री नंबर 0755 2420026, 109, 0755 2443201 है।

वाट्सएप नंबर 7049106300 पर भी है।

हेल्पलाइन नंबर 0755 244380, 1090 हैं।

दस माह में पांच सौ के पार छेड़खानी के मामले

शहर में महिला अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जनवरी 2019 से अक्टूबर तक छेड़खानी के 508 मामले दर्ज हो चुके हैं। 2017 में इस अवधि में छेड़खानी के 386 और 2018 में इस अवधि में 534 केस दर्ज हुए थे। वहीं अक्टूबर 2019 तक दुष्कर्म के 267 अपराध दर्ज हो चुके हैं। जबकि, 2017 और 2018 के दस माह के दौरान दुष्कर्म के क्रमश: 233 और 259 केस दर्ज हुए थे। इस लिहाज से इस साल दुष्कर्म का ग्राफ बढ़ा है।

पुलिस सजग है

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस लगातार सजग है। वुमन सेफ्टी ऐप क्यों काम नहीं कर रहा है, उसे चेक किया जाएगा। महिला अपराधों की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। निर्भया, मैत्री और शक्ति स्क्वॉड काम कर रही है। लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बनने के कारण इसका बल लगाया जाता है, इसलिए यह सुरक्षा दस्ते नजर नहीं आ पाते हैं। - इरशाद वली, डीआईजी भोपाल शहर

Posted By: Hemant Upadhyay