भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। कोई संयुक्त परिवार में नहीं रहना चाहता है तो कोई अपने पड़ोसी से परेशान होकर पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज कराने पहुंच जाता है। ऐसे मामलों में समझौता कराकर रिश्तों को टूटने से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के तहत तीन जिलों (भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर) में पारिवारिक व सामान्य झगड़ों को सुलझाने के लिए आनलाइन मीडिएशन शुरू किया गया। इसमें तीन माह में 910 मामलों में समझौता कराया गया। 15 जुलाई से तीन जिलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में पहुंचे 37 फीसद मामले सुलझाए गए। प्राधिकरण में मीडिएशन के माध्यम से 910 परिवारों के बीच समझौता कराया गया। वहीं, करीब 15 फीसद अन्य प्रकरणों का निराकरण किया गया है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर तीनों जिलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मप्र पुलिस महिला अपराध शाखा, लीगल वालेंटियर और ऊर्जा डेस्क के साथ मिलकर आनलाइन मीडिएशन किया जा रहा था।

इसमें तीनों जिलों को मिलाकर कुल 4,215 केस आए। इसमें से 910 मामलों में समझौता कराया गया। इनमें सबसे ज्यादा जबलपुर में मामले आए और समझौता कराया गया। इसे देखते हुए अब इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू किए जाने का प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। पुलिस थाना में पहुंचने वाले अनेक मामले ऐसे होते हैं, जिनमें मामूली विवाद के चलते एफआइआर दर्ज होती है और थाना-कचहरी के चक्कर काटने में बात अधिक बिगड़ जाती है। वहीं, इन केस के चलते थाने व कोर्ट में केस की संख्या भी बढ़ने लगती है।

दोनों पक्षों को आनलाइन जोड़ा जाता है

वर्तमान व्यवस्था में कुछ ही थानों में परामर्श केंद्र की व्यवस्था है। इस सुविधा से ऐसे थाने, जिनमें परामर्श केंद्र की सुविधा नहीं है, वहां के मामलों में मध्यस्थता आसान हो जाएगी। इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों को न तो थाना और कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाना है और न ही कहीं जाना है। इन मामलों की काउंसिलिंग काउंसलर्स के माध्यम से की जाती है है। दोनों पक्षों की सहमति मिलने के बाद ही उन्हें आनलाइन जोड़ा जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इसके लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विधि विशेषज्ञता प्राप्त 41 काउंसलर्स को नियुक्त किया गया था। करीब 97 थानों से मध्यस्थता के लिए केस भेजे गए।

प्री-लिटीगेशन में पिछले माह 226 मामले सुलझाए गए

वहीं, प्राधिकरण को प्री-लिटीगेशन मीडिएशन और पब्लिक यूटीलिटी लोक अदालत के माध्यम से कई प्रकरण को सुलझाने में सफलता मिल रही है। जहां प्री-लिटीगेशन मीडिएशन में पुलिस थानों में पहुंचने वाले सभी प्रकार के मामले को पहले काउंसिलिंग के माध्यम से सुलझाया जाता है। वहीं, पब्लिक यूटीलिटी लोक अदालत के तहत लोक अदालत लगने से पहले प्रकरण में समझौता कराया जाता है। प्राधिकरण द्वारा जुलाई माह में 129 और सितंबर 226 मामले सुलझाए गए।

केस-1

भोपाल के टीला जमालपुरा थाने में महिला ने प्रताड़ना की शिकायत की थी। आनलाइन काउंसिलिंग के दौरान पत्नी ने माना कि शिकायत झूठी थी। वह संयुक्त परिवार में नहीं रहना चाहती। ससुराल पक्ष को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने समझौता कर उसे राजी खुशी से अलग रहने की इजाजत दे दी।

केस-2

एमपी नगर थाने में युवक ने 26 जुलाई को पड़ोसी के खिलाफ शिकायती आवेदन दिया था। उसके मुताबिक पड़ोसी उसके मकान के कंस्ट्रक्शन के काम में बाधा डाल रहा है और विवाद मारपीट तक पहुंच गया है। इसमें पड़ोसी की गलती पाई गई। कमेटी ने पड़ोसी को चेतावनी व समझाइश दी। साथ में लिखित में लिया कि वह आवेदक को परेशान नहीं करेगा।

आनलाइन मध्यस्थता को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था। इसके अच्छे परिणाम आए हैं और यह एक अच्छा प्रयास हो सकता है कि कोर्ट और पुलिस थाने में आने वाले प्रकरण में कमी आएगी।

- एसपीएस बुंदेला, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भोपाल

फैक्‍ट फाइल

कुल केस आए - 4215 निराकरण - 910

भोपाल से पहुंचने वाले केस - 1,062 निराकरण- 215

ग्वालियर से पहुंचने वाले केस- 1,258 निराकरण - 217

जबलपुर से पहुंचने वाले केस - 1,895 निराकरण-478

Posted By: Ravindra Soni

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