Madhya Pradesh News: भोपाल । प्रदेश में पदोन्नत‍ि पर रोक लंबी खिंची तो विभागों ने पदोन्नत‍ि के वैकल्पिक रास्ते निकाल लिए हैं। करीब एक दर्जन विभागों ने अपने कर्मचारियों को वरिष्ठ पदों का लाभ दे दिया है। इससे असमानता की स्थिति बन गई है। समान श्रेणी के कर्मचारियों को अलग-अलग पदनाम से पुकारा जाने लगा है। इस स्थिति से कर्मचारी वर्ग में नाराजगी पनप रही है और मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने इसे मुद्दा बनाते हुए प्रदेश में पदोन्नत‍ि शुरू करने की मांग के साथ आंदोलन कर दिया है। संघ मुख्यमंत्री और सामान्य प्रशासन मंत्री को ज्ञापन सौंपा चुका है और 30 नवंबर को अधिकारी-कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाई गई है। जिसमें पदोन्नत‍ि शुरू कराने को लेकर सामूहिक रणनीति बनाई जाएगी।

प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नत‍ि पर साढ़े चार साल से रोक लगी है। इस बीच करीब 65 हजार कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए हैं। इसका सरकारी कामकाज पर गहरा असर पड़ा है। फिर भी सरकार पदोन्नत‍ि को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को जल्द कराने या पदोन्नत‍ि के विकल्प तलाशने की कोशिश नहीं कर रही है। प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा सहित कुछ और संवर्गों में उच्च पदों पर क्रमोन्न्ति देने का प्रविधान है।

इसलिए वे पदोन्नत‍ि पर रोक की सख्ती से बचे हुए हैं। इस प्रविधान का कोष एवं लेखा सहित कुछ और विभागों ने अनुसरण करते हुए उच्च पदों पर क्रमोन्न्ति के नियम बना लिए हैं। उल्लेखनीय है कि 30 अप्रैल 2016 को जबलपुर हाई कोर्ट ने 'मप्र लोक सेवा (पदोन्नत‍ि) अधिनियम 2002" खारिज कर दिया। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है। मामले में अब तक सुनवाई चल रही है।

किस विभाग ने क्या किया

कोष एवं लेखा ने राज्य प्रशासनिक सेवा की तरह उच्च पद पर क्रमोन्न्ति के नियम बना लिए और पदोन्न्ति पर रोक के प्रभार से बच गए। कुछ विभागों ने यह तर्क देकर कर्मचारियों को पदोन्न्त कर दिया कि हाई कोर्ट के फैसले से पहले विभागीय पदोन्न्ति समिति की बैठक हो चुकी थी। इसलिए यह नई कार्रवाई नहीं है। स्कूल शिक्षा विभाग, पशुपालन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में ऐसे उदाहरण हैं।

उच्च शिक्षा विभाग ने तो नायाब तरीका निकाला। वेतनमान के अनुरूप पदनाम देने का प्रविधान कर दिया। अब डिप्लोमा इंजीनियर और सहायक शिक्षक यही मांग कर रहे हैं। जबकि लोक निर्माण सहित अन्य निर्माण विभागों, विधानसभा सचिवालय ने प्रभारी व्यवस्था बना दी। वहीं पुलिस मुख्यालय ने मानद पदोन्नत‍ि का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। राज्य शिष्टाचार कार्यालय ने भी पिछले दिनों विभागीय पदोन्नत‍ि समिति की बैठक कर ली है।

हस्ताक्षर अभियान चला रहा संघ

पदोन्नत‍ि न मिलने से सभी वर्ग के कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं। सपाक्स व अजाक्स सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन पदोन्न्ति की मांग कर चुके हैं, पर पहली बार किसी कर्मचारी संगठन ने आंदोलन का ऐलान किया है। मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ज्ञापन सौंप चुका है और 30 नवंबर को सभी कर्मचारी संगठनों की बैठक बुलाई है। जिसमें चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनेगी।

पदोन्नत‍िनहीं मिलने से कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है। हम ज्ञापन सौंप चुके हैं और 30 नवंबर को संयुक्त बैठक बुलाई है। जिसमें आंदोलन की रणनीति बनेगी। अभी मंत्रालय में संघ का हस्ताक्षर अभियान चल रहा है। जिसमें उप सचिव से चपरासी तक पदोन्नत‍ि के लिए हस्ताक्षर कर रहे हैं।

सुधीर नायक, अध्यक्ष, मंत्रालयीन कर्मचारी संघ

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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