भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के कूनो पालपुर नेशनल पार्क में चीता लाए जाने की तारीख तय किए जाने के प्रयास चल रहे हैं, पर इस परियोजना के लिए जरूरी राशि का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। इस कारण अफ्रीका से चीता को हवाई जहाज से लाने सहित परियोजना के तहत अन्य कार्यों की तैयारी में देरी हो सकती है। भारत सरकार ने अब तक राशि दी नहीं है।

इंडियन आयल कारपोरेशन इस परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये देने को तैयार है लेकिन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन और पेटोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच अनुबंध नहीं हो पा रहा है। सूत्रों के अनुसार अनुबंध के लिए संबंधित मंत्रियों से समय न मिल पाने के कारण मामला टल रहा है। जबकि कारपोरेशन जनवरी 2022 में ही राशि देना चाहता था।

वन विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि परियोजना भारत सरकार की है लेकिन केंद्र ने वन विभाग को अपनी राशि से काम शुरू करने को कह दिया था। राशि मिलने की प्रत्याशा में विभाग टाइगर फाउंडेशन सोसायटी मद से 10 करोड़ रुपये खर्च कर कूनो पालपुर में चीता रखने के लिए बाड़ा और घास का मैदान तैयार कर चुका है। अब विभाग के पास भी ज्यादा राशि नहीं है। ऐसे में परियोजना का पूरा दारोमदार इंडियन आयल कारपोरेशन से मिलने वाली राशि पर टिका है। क्योंकि केंद्र से राशि मिलने में अभी वक्त लगने वाला है। सबसे बड़ी राशि अफ्रीका से चीता लाने पर खर्च होने वाली है। दरअसल, कतर हवाई उड्डे से दिल्ली तक चीता हवाई जहाज से लाए जाएंगे। इसके बाद का करीब पांच सौ किमी का सफर सड़क मार्ग से तय किया जाएगा। इसके लिए राशि का इंतजाम किए बगैर कदम आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में इंडियन आयल कारपोरेशन से भी राशि मिल जाए, तो समय से चीता लाए जा सकते हैं।

अगस्त में ही चीता लाने पर विचार

सरकार इस कोशिश में है कि अगस्त माह के अंत तक चीता पार्क में पहुंच जाएं लेकिन विशेषज्ञ इसे जल्दबाजी बताते हैं। वे कहते हैं कि वर्षाकाल में चीता लाना और उन्हें नई जगह पर बसाना उचित नहीं होगा। चीता हमारे लिए नया वन्यप्राणी है। उसके बारे में हम बहुत ज्यादा नहीं जानते हैं। ज्ञात हो कि वर्ष 1952 में भारत से चीता विलुप्त हो गया था।

दो स्थान से आएंगे चीता

सरकार की योजना दक्षिण अफ्रीका से 12 और नामीबिया से आठ चीता लाने की है। कूनो में बनाए गए बाड़े में 10 से 12 चीता रखे जा सकते हैं। पिछले दिनों मध्य प्रदेश आए विशेषज्ञों ने कूनो के बाद राजस्थान की मुकुंदरा हिल्स को भी पसंद किया है पर वहां राजनीतिक कारणों से चीता रखने की सहमति नहीं बन पा रही है। जबकि नौरादेही और गांधी सागर अभयारण्यों में अभी काफी तैयारी की जरूरत है।ऐसे में कूनो पालपुर नेशनल पार्क में चीता बसाने की उम्मीद बढ़ गई है।

Posted By: Ravindra Soni

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