Madhya Pradesh News: मनोज तिवारी, भोपाल(नवदुनिया स्टेट ब्यूरो)। शहद में मिलावट का मामला पिछले दिनों देशभर में सुर्खियों में रहा, लेकिन सुकून की बात यह है कि इस दाग को मध्य प्रदेश ने धो दिया है। मलेशिया ने प्रदेश की शहद को न सिर्फ पसंद किया है, बल्कि शुद्ध भी माना है। मलेशिया से आई प्रशासनिक और वन अधिकारियों की एक टीम यहां के शहद की गुणवत्ता देखकर खरीदने के लिए सहमति भी जता चुकी है। इस महीने के अंत तक शहद को लेकर मध्य प्रदेश व मलेशिया में अनुबंध होना लगभग तय है। शुरूआत में पांच टन से ज्यादा शहद मलेशिया जा सकताा है।

सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वायरमेंट (सीएसई) ने पिछले महीने देश के ज्यादातर बड़े ब्रांड की शहद की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। संस्था का दावा था कि शहद में मिलावट की जा रही है। इसका फायदा वन विभाग के विंध्य हर्बल ब्रांड को मिला है।

बाजार में शुद्ध शहद खोज रही मलेशिया सरकार ने प्रदेश की शहद की शुद्धता के दावों की वास्तविकता जानने के लिए अधिकारियों का एक दल पिछले महीने भोपाल भेजा था। जिसने बरखेड़ा पठानी स्थित विभाग के औषधि प्रसंस्करण केंद्र का दौरा किया और शहद की गुणवत्ता देखी। दल ने यह भी देखा कि शहद कहां से और कैसे लाया जा रहाा है और फिर उसकी साफ-सफाई करने में औषधीय गुण तो नष्ट नहीं हो रहे हैं।

इस जांच-पड़ताल के बाद टीम ने शहद को खरीदने लायक पाया है। प्रसंस्करण केंद्र के सीईओ विवेक जैन बताते हैं कि विंध्य हर्बल के पास तो आयात-निर्यात लाइसेंस है। मलेशिया सरकार को इसे देखना पड़ रहा है। क्योंकि लाइसेंस न होने की सूरत में शहद नहीं भेजी जा सकेगी। इसलिए पहले लाइसेंस की औपचारिकता पूरी होगी। वे बताते हैं कि शुरूआत में पांच टन शहद का ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।

20 फीसद बढ़ गई मांग

शहद में मिलावट की खबरें आने के बाद विंध्य हर्बल ब्रांड की शहद की मांग 20 फीसद बढ़ गई है। प्रसंस्करण केंद्र के सीईओ जैन बताते हैं कि हम सालाना 10 टन शहद बेचते हैं। हाल ही में शहद की मांग बढ़ गई है। फिलहाल ऑर्डर पूरे करने में दिक्कत आ रही है। हालांकि अगले महीने से शहद इकठ्ठा करने का सीजन (फरवरी से मई) शुरू हो जाएगा। इस दौरान छत्तों से शहद निकाला जाता है। वे बताते हैं कि यह सौ फीसद वनीय (जंगल की) शहद है, जो गांव-गांव में गठित प्राथमिक वनोपज समिति के सदस्यों से इकठ्ठी कराया जाता है।

इनका कहना है

मलेशिया ने प्रदेश की शहद को शुद्ध और पौष्टिकता से भरपूर पाया है। वहां की सरकार शहद खरीदने के लिए तैयार है। इसी महीने अनुबंध किया जा सकता है।

एसएस राजपूत, प्रबंध संचालक, मप्र राज्य लघु वनोपज संघ

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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