भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। Madhya Pradesh News प्रदेश के कर्मचारियों को जुलाई 2019 से लेकर मार्च 2020 तक के लिए भविष्य निधि पर ब्याज 7.9 प्रतिशत मिलेगा। जनवरी से जून तक यह दर आठ प्रतिशत थी। वित्त विभाग ने केंद्र सरकार द्वारा तय दर के हिसाब से नई दरें तय की हैं। अधिकारियों का कहना है कि इसमें प्रदेश सरकार की भूमिका नहीं रहती है। केंद्र सरकार जो दर तय करती है, वो ही यहां विभिन्न् निधि में जमा राशियों पर दी जाती है। उधर, इस मामले को लेकर सियासत शुरू हो गई है। भाजपा ने जहां इसे कर्मचारी विरोधी फैसला करार दिया। वहीं, कांग्रेस ने इसमें प्रदेश सरकार की भूमिका से साफ इंकार किया है।

कर्मचारी संगठनों ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में जुलाई से मार्च तक सामान्य व अंशदायी भविष्य निधि, पटवारी विशेष भविष्य निधि, मध्य भारत जीवन बीमा निधि और विभागीय भविष्य निधि पर मिलने वाले ब्याज की दर घटाने का विरोध किया है। दावा किया गया है कि इससे उन्हें पांच से 25 हजार रुपए का नुकसान होगा।

इसको लेकर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारी विरोधी काम कर रही है। जब हमारी सरकार थी, तब 8.75 प्रतिशत ब्याज भविष्य निधि पर मिलता था। इस निर्णय को वापस लिया जाना चाहिए, क्योंकि इससे दस लाख कर्मचारी सीधे-सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने भार्गव के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य निधि पर ब्याज दर में कमी केंद्र सरकार ने की है। राज्य सरकार के उनसे लिंक होने के कारण प्रदेश में यह कटौती की गई है। यदि केंद्र सरकार ब्याज दर बढ़ाती है तो हम भी बढ़ाते हैं और घटाती हैं तो हमें भी घटाना पड़ती है। इस मामले में भाजपा नेताओं को केंद्र सरकार से बात करनी चाहिए, क्योंकि यह विषय सीधे उन्हीं से जुड़ा है।

Posted By: Hemant Upadhyay