भोपाल (राज्य ब्यूरो)। प्रदेश में ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे मूल निवासी, जाति प्रमाण पत्र और भूमि से जुड़े दस्तावेज के लिए लोगों को शासकीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। विद्यार्थियों को स्कूल में ही जाति और मूल निवासी प्रमाण पत्र मिल जाएंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को सिंगल सिटीजन डाटाबेस को लेकर समीक्षा बैठक में व्यवस्था करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

उन्होंने कहा कि सभी लोगों के आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करने के लिए ग्राम स्तर पर अभियान चलाया जाए। जिन प्रदेशवासियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त हुआ है और जो बाकी रह गए हैं, उनकी जानकारी एक स्थान पर उपलब्ध रहे। योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं, कमियों और हितग्राहियों की परेशानियों को चिह्नित करने की व्यवस्था भी विकसित की जाए। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि समग्र डाटाबेस को विस्तार दिया जाएगा। इसमें पंजीकृत नागरिकों का ई-केवाईसी किया जाएगा। इससे सदस्य को प्राप्त योजनाओं के लाभ की जानकारी आसानी से मिल जाएगी। अब तक लगभग 48 लाख जाति प्रमाण पत्र की समग्र के साथ मैपिंग पूरी हो गई है। बैठक में हितग्राहीमूलक योजनाओं में समग्र का उपयोग सुनिश्चित करने, विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान करने के लिए एकल फार्म बनाए जाने और विवाह प्रमाण पत्र बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया को समग्र पोर्टल पर विकसित करने पर विचार विमर्श किया गया। इस दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विनोद कुमार, प्रमुख सचिव वित्त मनोज गोविल, प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अमित राठौर, प्रबंध संचालक मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रानिक्स विकास निगम नंदकुमारम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

कृषि, सहकारिता सहित अन्य विभागों के लिए पोर्टल होगा विकसित

सिटीजन सर्विस डिलीवरी पोर्टल संबंधी बैठक में मुख्यमंत्री ने विभागों के अलग-अलग पोर्टल की जगह एक पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। एक जैसी गतिविधियां संचालित करने वाले कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता सहित अन्य विभागों के लिए एक पोर्टल विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार हितग्राही को भुगतान करने संबंधी योजनाओं और अनुदान के लिए भी एक ही पोर्टल बनाया जाएगा।

Posted By: Ravindra Soni

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