भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए अब सरकार सख्ती बरतेगी। इसको लेकर परिवहन विभाग ने वाहन फिटनेस पालिसी बनाई है। वाहनों की फिटनेस की तकनीकी जांच की जाएगी। इसके लिए छह निजी कंपनियों ने आवेदन भी किया है। इसी तरह प्रदेश में संभाग स्तर पर वाहन प्रशिक्षण केंद्र भी खोले जाएंगे। इस व्यवस्था में अब वाहन चलाने का प्रशिक्षण लेने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाएगा। सड़क सुरक्षा अभियान को लेकर नवदुनिया ने प्रदेशभर की सड़कों का सर्वे किया, जिसमें कई खामियां सामने आई हैं। इन मुद्दों को लेकर राज्य के परिवहन आयुक्त संजय कुमार झा से बातचीत की गई। इसके मुख्य अंश.....

प्रश्न : वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा प्रणाली की कमी सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनी है, इसको लेकर मध्य प्रदेश में क्या व्यवस्था है?

उत्तर : परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 2023 के बाद सभी वाहनों का फिटनेस एटीएस (आटोमेेटेड टेस्टिंग स्टेशन) से करने की व्यवस्था की है। मध्य प्रदेश में भी नीति का प्रारूप तैयार करके शासन को स्वीकृत के लिए भेजा है। पीपीपी मोड यह व्यवस्था की जाएगी। संबंधित तकनीकी विशेष कंपनी द्वारा ही वाहनों की फिटनेस दी जाएगी। केंद्र सरकार के नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम में आठ आवेदन आएं हैं। प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों से इसकी शुरूआत करेंगे।

प्रश्न : 70 प्रतिशत हादसे तेज रफ्तार और ओवर टेकिंग के कारण होते हैं। इसे रोकने के लिए क्या कर रहे हैं?

उत्तर : प्रदेश में अभी भी हेलमेट लगाने की प्रथा नहीं है। दो पहिया वाहन चालकों में हेलमेट पहनने की आदत डालने के लिए परिवहन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। हम पुलिस के साथ समन्वय कर रहे हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश में आटो की जांच एवं वाहनों में हेलमेट और सीटबेल्ट का जांच अभियान चलाया जा रहा है। हेलमेट को लेकर कार्ययोजना भी बनाई है। हमने हाईवे पर ब्लैक स्पाट चि-त किए हैं। गृह, स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग के साथ समन्वय कर रहे हैं। ऐसे चिन्हित स्थानों पर कैमरे लगाए जा रहे हैं।

प्रश्न : ड्राइविंग टेस्ट और परीक्षा देने से बचने के लिए अभी भी दलालों का सहारा लिया जा रहा है। इसे कैसे समाप्त करेंगे।

उत्तर : यह बात सही है कि दलालों से अभी भी पूरी तरह छुटकारा नहीं मिला है। इनसे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने ड्राइविंग ट्रेंनिंग सेंटर खोलने की योजना बनाई है। इसके तहत प्रदेश में संभागीय स्तर पर ड्राइविंग ट्रेंनिग सेंटर खोले जाने हैं। इंदौर में इंस्टीट्यूट आफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च बनाया जाएगा। जिलों में यह सेंटर निजी लोगों के द्वारा भी खोले जा सकेंगे। वाहन चलाने का प्रशिक्षण लेने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।

प्रश्न : - अन्य राज्य का व्यक्ति प्रदेश में हाईवे पर दुर्घटनाग्रस्त होता है तो अपनी लोकेशन नहीं बता पाता। इसके लिए प्रदेश में क्या लोकेशन बेस्ड सर्विस है?

उत्तर : डायल 100 पर मदद के लिए काल करने पर घायल की लोकेशन मिल जाती है। वर्तमान में अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि, कुछ वाहन निर्माता कंपनियों ने वाहनों में सिस्टम लगाया है, जिससे दुर्घटनाग्रस्त होने पर स्वत: सूचना पहुंच जाएगी। मध्य प्रदेश में भी आगे यह व्यवस्था होगी, लेकिन वर्तमान में हम डायल 100 के ही भरोसे है।

प्रश्न : प्रदेश में अधिकांश हाईवे पर एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं है, इसको लेकर क्या कर रहे है।

उत्तर : आमतौर पर प्रदेश के सभी टोल नाकों पर एम्बुलेंस उपलब्ध रहती है। इन सभी एम्बुलेंस को डायल 100 से जोड़ा जा रहा है। इससे सड़क दुर्घटना होती है तो डायल 100 की मदद से एम्बुलेंस तत्काल हादसे की जगह पर पहुुंच जाएगी। घायल को ट्रामा सेंटर तक जल्द ले जाने की व्यवस्था को लेकर भी कार्ययोजना बनाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर इस पर काम कर रहे हैं।

प्रश्न : क्रैश टेस्ट रेटिंग, सीट बेल्ट, एयरबैग, टायर, एंटीफोगिंग लाइट, ब्रेकिंग सिस्टम आदि की जांच किसी तरह की जा रही है। क्या इसके लिए कोई सिस्टम बनाया गया है।

उत्तर : यह सभी चीजें फिटनेस के समय देखी जाती हैं। सीटबेल्ट वाहन के आगे और पीछे की सीट पर अनिवार्य कर दिया है। हम आमजन को भी जागरूक कर रहे हैं कि वे सीट बेल्ट लगाएं। स्कूल में जाकर हम बच्चों इन व्यवस्थाओं के बारे में बता रहे हैं। गाड़ियों में फाग लाइन सहित अन्य व्यवस्थाएं हो, इसके लिए ट्रकों की जांच की जा रही है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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