Madhya Pradesh Politics : भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू की कांग्रेस में वापसी के बाद अब ग्वालियर-चंबल संभाग के बड़े नेताओं में गिने जाने वाले चौधरी राकेश चतुर्वेदी पर कांग्रेस नेताओं की निगाहें टिकी हैं। उनका विरोध करने वाले कुछ नेताओं के तेवर ठंडे पड़े हैं, जबकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की नाराजगी आज भी बनी हुई है।

वहीं, अब तक संगठन की तरफ से उस तरह के प्रयास शुरू नहीं हुए, जिस तरह गुड्डू की वापसी के लिए उनसे नाराज नेताओं को आमने-सामने बैठाकर चर्चा कराई गई थी। ग्वालियर-चंबल संभाग में कांग्रेस के पास ब्राह्मण नेता के नाम पर सत्यदेव कटारे के निधन के बाद अब प्रवीण पाठक-हेमंत कटारे युवा नेता हैं।

चौधरी राकेश चतुर्वेदी कांग्रेस में आ चुके हैं, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में चले जाने के बाद वे अलग-थलग पड़ गए। इसके बाद भी क्षेत्र में उनके प्रभाव को आंकने वाले नेताओं का दावा है कि उपचुनाव में अकेली भिंड जिले की एक सीट ही नहीं आसपास की अन्य सीटों पर भी ब्राह्मण वोट का फायदा पार्टी प्रत्याशियों को होगा।

चतुर्वेदी पर कांग्रेस में दो मत

इधर, चतुर्वेदी को भिंड में मेहगांव से टिकट दिए जाने की चर्चा की सुगबुगाहट शुरू होते ही विरोधी सक्रिय हो गए और भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री व कमल नाथ की बैठक में उनका विरोध किया। सूत्र बताते हैं कि चतुर्वेदी के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी खेमे की तरफ से प्रयास हुए थे। कमल नाथ भी उनके नाम पर सकारात्मक हैं।

माना जा रहा है कि संगठन की कोशिश है कि हर एक सीट पर विजयी प्रत्याशी को उतारा जाए और कांग्रेस विचारधारा के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। चतुर्वेदी के नाम पर विरोध करने वाले नेताओं में से कुछ नेताओं के तेवर ठंडे हुए हैं।

ग्वालियर-चंबल संभाग के इन नेताओं ने अब तर्क दिया है कि चतुर्वेदी की भिंड-मुरैना-ग्वालियर में ब्राह्मण वोट पर पकड़ है। कुछ बुजुर्ग नेता भी चतुर्वेदी के प्रति नरम रुख कर रहे हैं।

चतुर्वेदी की निष्ठा पर भी विरोधी उठा रहे सवाल वहीं

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की नाराजगी अभी कम होती नहीं दिखाई दे रही है। उनके समर्थक भी कहते हैं कि सदन के भीतर पार्टी को धोखा देने वालों के साथ नरमी नहीं बरती जाना चाहिए। गौरतलब है कि चतुर्वेदी कभी श्यामाचरण शुक्ल खेमे के माने जाते थे और मध्य प्रदेश विभाजन के बाद में वे दिग्विजय सिंह के साथ हो गए।

इसके बाद उन्होंने सुरेश पचौरी का साथ लिया, लेकिन भाजपा में चले गए और वहां से लौटने के लिए उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया का सहारा लिया था। अब वे फिर पचौरी खेमे के माध्यम से कमल नाथ तक पहुंच गए हैं और उनके विरोधी भी सक्रिय हो गए हैं। मगर गुड्डू को टिकट का आश्वासन मिलने के बाद राकेश चतुर्वेदी के नाम पर भी जल्द फैसले की अटकलें लगाई जा रही हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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