भोपाल। Madhya Pradesh Professional Examination Board व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 में 31 आरोपितों को भोपाल की सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी पाया है। गुस्र्वार को इन सभी को दोषी पाने के साथ ही न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है। अब इन्हें 25 नवंबर को विशेष अदालत सजा सुनाएगी। मामले की सुनवाई सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसबी साहू की कोर्ट में हुई।

व्यापमं द्वारा आयोजित पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा की जांच एसटीएफ कर रही थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह मामला दिसंबर 2015 में सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था। सीबीआई ने जांच के आधार पर भोपाल की विशेष अदालत में अप्रैल 2017 में चालान पेश किया था। जिनके खिलाफ चालान पेश किया गया था उनमें 12 उम्मीदवार, उनके स्थान पर शामिल होने वाले 12 फर्जी उम्मीदवार समेत फर्जी उम्मीदवारों की व्यवस्था करने वाले दलाल शामिल थे। सीबीआई ने इनके खिलाफ फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था।

इन्हें पाया दोषी

राहुल पांडे निवासी वाराणसी (उत्तर प्रदेश), आशी कुमार पांडे निवासी मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश), कुलविजय वर्मा निवासी बाराबंकी (उत्तर प्रदेश), अभिषेक कटियार निवासी फस्र्खाबाद (उत्तर प्रदेश), सुयश सक्सेना निवासी काशीराम नगर (उत्तर प्रदेश), प्रभाकर शर्मा निवासी मुरैना, प्रदीप त्यागी निवासी मुरैना, नीरज मिश्रा निवासी प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), अनिल यादव निवासी प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), अजय सिकरवार निवासी मुरैना, धर्मेश सिंह निवासी आगरा (उत्तर प्रदेश), फूलकुंवर सिंह निवासी मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश), देवेंद्र यादव निवासी झांसी (उत्तर प्रदेश), अजीत चौधरी निवासी मथुरा (उत्तर प्रदेश), भूपेंद्र सिंह निवासी मुरैना, सतीश शर्मा निवासी मुरैना, चंद्रपाल कश्यप निवासी फस्र्खाबाद (उत्तर प्रदेश), पंजाब सिंह जाटव निवासी मुरैना, शिवशंकर निवासी मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश), मुकेश सिंह गुर्जर निवासी ग्वालियर, अस्र्ण गुर्जर निवासी ग्वालियर, उदयभान सिंह निवासी ग्वालियर, दिनेश धाकड़ निवासी मुरैना, अतेंद्र सिंह निवासी भिंड, परवेंद्र सिंह निवासी मुरैना, सुदीप शर्मा निवासी भिंड, अजय प्रताप सिंह निवासी मुरैना, कलियान सिंह निवासी मुरैना, गुलवीर सिंह निवासी मथुरा (उत्तर प्रदेश), राजवीर सिंह निवासी मुरैना और निवास जाटव निवासी मुरैना।

ऐसे किया था फर्जीवाड़ा

व्यापमं की पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में दलालों ने असली उम्मीदवारों से संपर्क किया था। दलालों ने कहा था कि उनके स्थान पर वे फर्जी उम्मीदवारों को शामिल कराएंगे, जिससे उनका चयन सुनिश्चत हो जाएगा। इसके एवज में असली उम्मीदवार से दो लाख स्र्पए तक की राशि ली गई। परीक्षा देने के एवज में फर्जी उम्मीदवारों को 50 हजार स्र्पए तक दिए गए। इसके बाद असली उम्मीदवारों के स्थान पर फर्जी उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी। इसके लिए फर्जी तरीके से प्रवेश पत्र तक तैयार किए गए थे। एसटीएफ को मुखबिर के जरिये इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली थी। एसटीएफ की जांच में फर्जीवाड़ा सही पाया गया था।

Posted By: Hemant Upadhyay