भोपाल। कमलनाथ सरकार विधानसभा चुनाव के समय प्रदेशवासियों से किया एक और वादा जल्द पूरा करने की तैयारी में जुट गई है। इसके तहत प्रदेश के मंत्रियों और विधायकों को सदन में अपनी संपत्ति का खुलासा करना होगा। इसके लिए विधानसभा में संसदीय कार्य विभाग संकल्प प्रस्तुत करेगा। इसे लेकर विभागीय मंत्री डॉ.गोविंद सिंह ने अधिकारियों को मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि सब कुछ ठीक रहा तो विधानसभा के शीतकालीन सत्र में संकल्प पेश किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने वचन पत्र में यह वादा किया था कि जनप्रतिनिधियों के लिए साल में एक बार संपत्ति को सार्वजनिक करना होगा। इसके मद्देनजर सरकार ने वचन पत्र से जुड़ी गैर आर्थिक मुद्दों को जल्द से जल्द पूरा करने की रणनीति बनाई है। मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती ने सभी विभागों को इन पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं।

संसदीय कार्य विभाग को जनप्रतिनिधियों द्वारा सालाना संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की व्यवस्था बनानी थी। विभाग ने इसके लिए पहले विधेयक का मसौदा तैयार किया था लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी। जबकि, पंजाब में कांग्रेस सरकार ने इसे लेकर कानून बनाया है। बताया जा रहा है कि इसे लेकर अब संकल्प लाने की तैयार है।

इसमें सरकार कहेगी कि विधानसभा के सभी सदस्य सदन में सालाना संपत्ति का ब्योरा पटल पर रखेंगे। इसे अनिवार्य या ऐच्छिक करने का निर्णय मुख्यमंत्री कमलनाथ करेंगे। संसदीय कार्य मंत्री डॉ.गोविंद सिंह का कहना है कि अधिकारियों को संकल्प को लेकर नियम-कायदों का परीक्षण करने के लिए कहा है। उधर, विभागीय अधिकारियों ने भी विधानसभा के दिसंबर में प्रस्तावित शीतकालीन सत्र में संकल्प प्रस्तुत करने की संभावना को देखते हुए तैयारी तेज कर दी है।

शिवराज ने 2010 में की थी शुरुआत

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2010 में मंत्रिमंडल के सदस्यों द्वारा विधानसभा में बजट सत्र के दौरान संपत्ति का ब्योरा सदन के पटल पर रखने की शुरुआत की थी। 2013 तक यह सिलसिला चलता रहा लेकिन फिर सत्ता में आने के बाद इसे लेकर गंभीरता खत्म हो गई। 2015 में वित्त मंत्री जयंत मलैया और 2017 में कैबिनेट मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने ही संपत्ति का ब्योरा पटल पर रखा। इसे लेकर मंत्रियों की आलोचना भी हुई थी।

Posted By: Hemant Upadhyay