भोपाल। प्रदेश सरकार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किए जाने वाले दूसरे अनुपूरक बजट में सर्वाधिक राशि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसान और सड़कों के लिए रख सकती है। अतिवर्षा से खरीफ की 16 हजार करोड़ रुपए मूल्य से ज्यादा की फसल चौपट हुई है। वहीं, तीन हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की अधोसंरचना को नुकसान पहुंचा है। इसमें सबसे अधिक क्षति सड़क, पुल व पुलियों को पहुंचा है। उधर, केंद्र सरकार से अभी तक प्रदेश को राहत पैकेज नहीं मिला है।

कमलनाथ सरकार ने अतिवर्षा और बाढ़ से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए करीब पौने सात हजार करोड़ रुपए का राहत पैकेज मांगा है। मुख्यमंत्री स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं तो मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर चुके हैं। केंद्रीय अध्ययन दल ने प्रदेश में बड़े नुकसान की बात तो मानी है पर अभी तक राहत पैकेज को अंतिम रूप नहीं दिया हैं।

उधर, प्रभावितों को राहत पहुंचाने का दबाव सरकार के ऊपर बन रहा है। भाजपा किसानों को राहत नहीं देने का मुद्दा लगातार उठा रही है। विधानसभा सत्र में सरकार को घेरने यह भाजपा विधायक दल का मुख्य मुद्दा होगा। इसे देखते हुए सरकार ने दूसरे अनुपूरक बजट में सबसे अधिक राशि राजस्व, कृषि और लोक निर्माण विभाग को देने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

अपर मुख्य सचिव वित्त अनुराग जैन, प्रमुख सचिव मनोज गोविल की टीम अनुपूरक बजट को लेकर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के साथ विभागीय बजट संबंधी जरूरतों का आकलन कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अनुपूरक बजट में सिर्फ उन्हीं विभागों को राशि मिलेगी, जिनका काम अटकने की नौबत आ गई है। सूत्रों का कहना है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास, कृषि विभाग को किसान कर्जमाफी और नए कृषि कॉलेजों के लिए राशि की दरकार है।

अगले सप्ताह से शुरू होगी मशक्कत

बताया जा रहा है कि अनुपूरक बजट को लेकर वित्त विभाग में मशक्कत का सिलसिला अगले सप्ताह से शुरू होगा। विभागों के प्रस्तावों पर अधिकारियों को बुलाकर चर्चा की जाएगी। उधर, मुख्य सचिव भी वरिष्ठ अधिकारियों से बात करेंगे। यह भी देखा जाएगा कि आगामी एक-डेढ़ माह में सरकार को केंद्रीय अनुदान सहित कहां से कितनी आय होगी। इसके आधार पर अनुपूरक बजट का आकार तय होगा।

Posted By: Hemant Upadhyay