भोपाल। प्रदेश सरकार किसानों को जैविक खाद के फर्जीवाड़े से बचाने के लिए अब सहकारी समितियों के माध्यम से मिलने वाली खाद के साथ उसकी टेस्ट रिपोर्ट भी देगी। यह नई व्यवस्था कृषि विभाग लागू करने जा रहा है। वहीं, खाद वितरण को आधार से लिंक भी किया जा रहा है, ताकि खाद वितरण के नाम पर होने वाला खेल बंद किया जा सके। दरअसल, पिछले दिनों आदिवासी क्षेत्रों में खाद वितरण के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। इसके बाद ही व्यवस्था में बदलाव का निर्णय किया गया है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आदिवासी किसानों को जैविक खाद देने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग ने विशेष योजना के तहत 100 करोड़ रुपए दिए थे। इसमें भारी गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थी। विधानसभा में ध्यानाकर्षण लगने पर जांच की घोषणा करने के साथ यह तय किया गया कि आगे ऐसा न हो, इसके लिए व्यवस्था में सुधार किया जाए। इसके मद्देनजर तय किया गया है कि अब आदिवासियों को जो भी जैविक खाद दी जाएगी, उसकी टेस्ट रिपोर्ट भी मिलेगी।

इसके साथ ही खाद वितरण व्यवस्था को आधार से भी लिंक किया जाएगा। इससे यह तय हो जाएगा कि जिस बैच की खाद किसान को दी गई है, उसकी जांच हो चुकी है या नहीं। इसके साथ ही आधार से लिंक होने पर यह पुख्ता हो जाएगा कि खाद का वितरण किसान को हुआ या नहीं।

इसके लिए पाइंट ऑफ सेल्स (पीओएस) मशीन का उपयोग किया जाएगा। बायोमेट्रिक से किसान की पहचान होने के बाद ही खाद का वितरण होगा। यह व्यवस्था यूरिया, डीएपी और कॉम्प्लेक्स खाद के वितरण में लागू है।

घोटाले की जांच के लिए बनाई समिति

उधर, कृषि विभाग ने जैविक खाद के नाम पर हुई अनियमितता की जांच के लिए सात विधायक, अनुसूचित जनजाति कल्याण और कृषि विभाग के अधिकारियों की समिति बनाई गई है। समिति जांच करके रिपोर्ट कृषि विभाग को देगी और फिर कार्रवाई का निर्णय होगा। इसके आधार पर आगामी विधानसभा के सत्र में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है।

Posted By: Hemant Upadhyay