Madhya Pradesh Tiger Reserve: भोपाल(राज्य ब्यूरो)। प्रदेश के कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, संजय दुबरी और पन्ना टाइगर रिजर्व का मैनेजमेंट इफेक्टिवनेस इवैल्युएशन (एमईई) सर्वे किया जा रहा है। इसमें पार्कों में बाघों की सुरक्षा, सुविधा और प्रबंधन के आधार पर रैंकिंग की जाएगी। सर्वे शुरू हो चुका है। इसमें देखा जा रहा है कि पार्कों में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। पिछला सर्वे वर्ष 2018 में हुआ था, जिसकी देशव्यापी रिपोर्ट जारी की गई थी। जिसमें प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व और केरल के पेरियार पार्क को बराबर अंक मिले थे।

सर्वे में यह देखा जा रहा

सर्वे के दौरान देखा जा रहा है कि पार्क प्रबंधन ने एनटीसीए को प्रबंधन प्लान भेजा है या नहीं। एनटीसीए की गाइड लाइन का कितना पालन किया जा रहा है। पार्क में बाघों के लिए पर्याप्त खाने और पानी का प्रबंध है या नहीं। बाघों की मौत की क्या स्थिति है। इसमें प्राकृतिक, आपसी लड़ाई, शिकार से कितनी मौत हुई हैं। बाघ कारीडोर और बाघ-मानव द्वंद की घटनाएं कितनी हो रही हैं और उसके कारण क्या हैं? पार्क में पर्यटन, पर्यटकों के लिए सुविधाएं और पर्यटकों के पांच साल के अनुभवों को भी सर्वे में शामिल किया गया है। यह भी देखा जा रहा है कि पार्क प्रबंधन ने अपनी ओर से बाघ प्रबंधन के क्या उपाय किए हैं।

पेंच को मिले थे 93.75 अंक

वर्ष 2018 में 50 पार्कों का सर्वे कराया गया था। इसमें से देश के 21 टाइगर रिजर्व की रैंकिंग जारी की गई थी। जिसमें पेंच टाइगर रिजर्व को सौ में से सबसे अधिक 93.75 अंक मिले थे। वहीं प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व को 92.97 और सतपुड़ा को 90.63 अंक मिले थे। जबकि 93.75 अंक लेकर केरल का पेरियार पार्क बराबर में रहा था। उल्लेखनीय है कि देश में वर्ष 2006 से एमईई सर्वे की शुरूआत हुई है, जो प्रत्येक चार साल में कराया जाता है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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