भोपाल। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी वर्ष 2018 के अपराधों के आंकड़ों में मध्य प्रदेश में फिर दुष्कर्म की सबसे ज्यादा घटनाएं सामने आईं हैं। यहां हर रोज लगभग 15 बच्चियों या महिलाओं को वहशी लोगों ने अपनी हवस का शिकार बनाया। इस दौरान यहां शिवराज सिंह चौहान की सरकार थी। मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान और उत्तरप्रदेश में इन घटनाओं से महिलाएं पीड़ित रहीं। वहीं, देश में उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र के बाद आपराधिक घटनाओं के मामले में मध्य प्रदेश तीसरे नंबर रहा। महिला संबंधी अपराधों को लेकर सरकारें जितनी चिंता करती हैं, उसके बाद भी लोगों की मानसिकता में विशेष बदलाव दिखाई नहीं दे रहा। इसका अंदाज महिलाओं के साथ दुष्कर्म, छेड़छाड़ की घटनाओं से लगाया जा सकता है। मध्य प्रदेश वर्ष 2018 में भी 5450 दुष्कर्म की घटनाओं के कारण देश में पहले नंबर रहा है। चिंता की बात रही कि इन घटनाओं में 54 ऐसी भी हैं जो छह साल या इससे कम उम्र की बच्चियों के साथ घटीं। वहशीपन की हद यह भी रही कि 60 साल से अधिक उम्र की 11 वृद्ध महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाओं से मप्र शर्मसार हुआ है।

मध्य प्रदेश अपराध के मामले में तीसरे नंबर पर

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अथीन संचालित नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2018 के अपराधों की रिपोर्ट में देश में सबसे ज्यादा अपराध महाराष्ट्र में घटे। दूसरे नंबर उत्तर प्रदेश रहा तो मध्य प्रदेश दो लाख 48 हजार 354 अपराध के साथ तीसरे नंबर रहा। जबकि मप्र में 2017 और 2016 की तुलना में 2018 में अपराधों में कमी आई थी। 2016 की तुलना में 2018 में जहां करीब 16 हजार और 2017 की तुलना में करीब 21 हजार की कमी आई है।

6 से 18 साल उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के 2841 मामला

मध्य प्रदेश में 2018 में छह साल से 18 साल के बीच की बच्चियों व युवतियों के साथ 2841 घटनाएं हुईं। इनमें सबसे ज्यादा 16 से 18 साल की युवतियों के साथ 1502 घटनाएं हुईं। 12 से 16 साल की किशोरवय 1143 लड़कियां भी दुष्कर्म की शिकार बनीं। छह साल से 12 साल की 142 बच्चियों को भी वहशियों की दरिंदगी का शिकार बनीं। वयस्क युवतियों में से 18 से 30 साल की 1798 युवतियों के साथ 2018 में दुष्कर्म की घटनाएं हुईं। 30 से 45 साल की महिलाओं के साथ 725, 45 से 60 की उम्र की महिलाओं के साथ 75 ऐसी घटनाएं हुईं। दुष्कर्म की घटनाओं में मध्य प्रदेश की स्थिति सबसे खराब है, क्योंकि ऐसी घटनाओं में दूसरे नंबर रहे राजस्थान में भी मप्र से एक हजार से ज्यादा का अंतर है।

Posted By: Prashant Pandey