भोपाल। पांच वर्ष से पानी की कमी से जूझ रहे मध्यप्रदेश पर इस बार इंद्र देवता खासे मेहरबान हैं। प्रदेश में अभी तक सामान्य(894.6 मिमी) के मुकाबले 1192.2 मिमी वर्षा हो चुकी है,जो कि सामान्य से 33 फीसदी अधिक है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक पिछले 24 साल में दूसरी बार मप्र में रिकार्ड बरसात हुई है।

इसके पहले वर्ष 2013 में पूरे सीजन में प्रदेश में 1305.1 मिमी बरसात हुई थी। उधर मंगलवार को बंगाल की खाड़ी के आंध्रा कोस्ट पर एक ऊपरी हवा का चक्रवात बन गया है। इसके 24 घंटे में कम दबाव का क्षेत्र बनकर आगे बढ़ने की संभावना है। इस सिस्टम के प्रभाव से दो दिन बाद प्रदेश के अनेक स्थानों पर झमाझम बरसात का एक और दौर शुरू होने के आसार हैं।

मौसम विज्ञान केंद्र के प्रवक्ता के मुताबिक वर्ष-1996 से 2019 तक प्रदेश में अभी तक सिर्फ दो बार ही रिकार्ड बरसात हुई है। वर्ष-2013 के बाद इस बार सामान्य से काफी अधिक बरसात हुई है। साथ ही बारिश का सिलसिला जारी हैं। इसी क्रम में मंगलवार को सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक खंडवा में 49, दमोह मे 34,पचमढ़ी में 29,नसस्र्ल्लागंज(सीहोर) में 17, जबलपुर में 9.4, होशंगाबाद में 5,सागर में 4,भोपाल में 3.4,खजुराहो में 1.2,बैतूल में 1 मिमी. बरसात हुई। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि पिछले 10 दिन से प्रदेश में सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र अब ऊपरी हवा के चक्रवात में तब्दील होकर पूर्वी मप्र में सक्रिय है।

साथ ही मानसून ट्रफ भी सीधी से होकर गुजर रहा है। इससे प्रदेश में कई स्थानों पर रुक-रुक कर बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी है। बंगाल की खाड़ी में बने नए सिस्टम से दो दिन बाद प्रदेश में एक बार फिर बरसात की गतिविधियों में और तेजी आएगी।

ये सिस्टम हैं सक्रिय

पूर्वी मध्य प्रदेश एवं उसके आसपास के इलाके में 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक चक्रवाती हवा का घेरा बना हुआ है। मानसून द्रोणिका फिरोजपुर, बागपत, इटावा, सीधी, डाल्टनगंज, मालदा से नागालैंड तक जा रही है।

बंगाल की खाड़ी से लगे लगे आंध्रप्रदेश में समुद्र तट पर हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवाती हवा का घेरा बना हुआ है। इस सिस्टम के अगले 24 घंटे के दौरान कम दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना है। इसके अतिरिक्त पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी से पूर्वी मध्यप्रदेश तक हवा के ऊपरी भाग में एक द्रोणिका बनी हुई है।