भोपाल। इंदौर में 18 अक्टूबर को होने वाली इन्वेस्टर्स मीट (मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश) के दौरान दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) के तहत लगने वाले उद्योगों की रूपरेखा भी बनेगी। कॉरिडोर के पहले चरण में यहां मौजूद भूमि की उपलब्धता के चलते कई नए उद्योगों के आने की संभावना जताई गई है। इसलिए सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्योगों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत प्रदेश की इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप को भी बढ़ावा मिलेगा, यही कारण है कि इंदौर आने वाले उद्योगपतियों के सामने सरकार ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य का यह पक्ष भी रखने की योजना बनाई है। महत्वाकांक्षी डीएमआईसी परियोजना देश के कई राज्यों को कवर करेगी, सरकार का आकलन है कि कॉरिडोर के आसपास विकसित होने वाली औद्योगिक टाउनशिप में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। टाउनशिप को छोटे शहर के रूप में विकसित किया जाएगा।

नीमच-नयागांव व रतलाम-नागदा

विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में एकीकृत इंडस्ट्रियल टाउनशिप पीथमपुर-धार-महू औद्योगिक क्षेत्र में विकसित की जा रही है। इसके अलावा नीमच-नयागांव तथा रतलाम-नागदा क्षेत्र को भी दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के निवेश और औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल किया गया है।

देश की राजधानी दिल्ली से कारोबारी राजधानी मुंबई तक की दूरी तय करने वाला यह कॉरिडोर देश के कई कारोबारी क्षेत्रों से गुजरेगा। इसलिए कॉरिडोर के दोनों ओर निवेशकों के लिए भूखंड उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है, जिससे नए-नए उद्योगपति निवेश के लिए आगे आ सकें।

आईटी एवं खाद्य प्रसंस्करण

बताया जाता है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में संपन्न् बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि डीएमआईसी के तहत राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के उद्योग लगाए जाएंगे। इनके अलावा वाहन एवं वाहन कलपुर्जे क्षेत्र को भी प्राथमिकता देने पर भी सहमति बनी है। उल्लेखनीय है कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के चलते ही देश में पीथमपुर की अलग ही पहचान है।

निवेशकों को लुभा रहीं मप्र की जमीनें

निवेश की संभावनाओं के पीछे प्रमुख आकर्षण यहां जमीनों की उपलब्धता को माना जा रहा है। उद्योगों के लिए देश के अन्य राज्यों में जमीनें इतनी नहीं है। राज्य सरकार ने लैंड बैंक भी बनाया है। सरकार का दावा है कि कारोबारी सुगमता की रैंकिंग में मप्र टॉप टेन राज्यों में शामिल है। डीएमआई कॉरिडोर परियोजना के पहले चरण में भूभाग की दृष्टि से मप्र की हिस्सेदारी सबसे बड़ी मानी गई है।