डॉ. जितेंद्र व्यास. इंदौर। सत्ता का गलियारा कहे जाने वाले जिस मालवा-निमाड़ क्षेत्र में भाजपा ने वर्ष 2018 के चुनाव में खासा नुकसान उठाया था, मंत्रिमंडल गठन में उसी क्षेत्र को फिर मजबूत करने की कवायद सत्ता और संगठन स्तर पर नजर आई है। सात नए चेहरों के साथ इन क्षेत्रों से नौ मंत्री शामिल किए गए हैं, जबकि इंदौर जिले से तुलसी सिलावट पहले ही कैबिनेट मंत्री हैं।

2013 के चुनाव में मालवा-निमाड़ की 66 में से 57 सीटें जीतने वाली भाजपा को 2018 में इस क्षेत्र में सिर्फ 28 सीटें ही मिल सकी थीं। इसी इलाके की बढ़त ने कांग्रेस को सत्ता पर काबिज भी किया था। नई सरकार ने आते ही अपने दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार में इस क्षेत्र पर खासा ध्यान दिया है। मालवा-निमाड़ से सिंधिया खेमे के तीन मंत्रियों सहित सात नए चेहरों को जगह मिली है।

कहीं समाज को साधने के फॉर्मूले का इस्तेमाल किया गया तो कहीं गुटीय संतुलन को तवज्जो दी गई। 10 बार भाजपा को लोकसभा सीट और सालों से विधानसभा सीटों पर बड़े अंतर से जीत दिलाता आ रहा इंदौर शहर मंत्रिमंडल में इस बार भी खाली हाथ रहा।

इस विस्तार में शहरी दावेदारों को पीछे छोड़ते हुए महू विधायक उषा ठाकुर को स्थान मिला है। क्षेत्र क्रमांक दो के विधायक रमेश मेंदोला के लिए शपथ ग्रहण के अंतिम समय तक जोर-आजमाइश होती रही, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व और संगठन ने 'इस बार शामिल नहीं कर पा रहे हैं' का मैसेज दे दिया। गुस्साए मेंदोला समर्थकों ने सोशल मीडिया और सड़कों पर प्रदर्शन किए।

आदिवासी वोट साधने के लिए शाह और पटेल को स्थान

मालवा-निमाड़ क्षेत्र के छह जिले आदिवासी बहुल हैं। इस वर्ग को प्रतिनिधित्व देते हुए हरसूद से वरिष्ठ भाजपा नेता विजय शाह और बड़वानी विधायक प्रेमसिंह पटेल को मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। शाह लगातार चौथी बार मंत्री बने हैं तो पटेल 1993 से विधायक हैं और 2013 के चुनाव को छोड़कर लगातार जीत हासिल करने वाले विधायक रहे हैं। पटेल खरगोन-बड़वानी की 10 विधानसभा सीटों में से जीत हासिल करने वाले इकलौते भाजपा विधायक भी हैं।

मंदसौर-नीमच : दो जिलों से तीन मंत्री

भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में मंदसौर-नीमच क्षेत्र का अनुभव कड़वा रहा था। किसान आंदोलन और गोलीकांड की आंच से चुनाव पर असर की दहशत भाजपाई हलकों में महीनों तक कायम रही। नए मंत्रिमंडल में इस क्षेत्र से तीन विधायकों को स्थान मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्रकुमार सकलेचा के बेटे व वरिष्ठ विधायक ओमप्रकाश सकलेचा और वरिष्ठ विधायक जगदीश देवड़ा मंत्री बनाए गए हैं।

जैन समाज से पारस जैन, चेतन्य काश्यप और सकलेचा के नामों पर रस्साकशी हुई जिसमें से सकलेचा के नाम पर मुहर लगी। इसी तरह देवड़ा भाजपा की पिछली दो सरकारों में मंत्री रह चुके हैं, लेकिन वर्ष 2013 में नए चेहरों को मौका देने के लिए उन्हें स्थान नहीं मिला था। इस बार वे भी जगह बनाने में कामयाब रहे। इस क्षेत्र से तीसरा नाम कांग्रेस से भाजपा में आए सुवासरा विधायक हरदीप सिंह डंग का है। दूसरी बार के विधायक डंग ने सबसे पहले सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस से इस्तीफा दिया था।

नए चेहरों को मौका

उज्जैन दक्षिण से दूसरी बार विधायक बने मोहन यादव और शुजालपुर के इंदरसिंह परमार को भी नए चेहरों के रूप में मंत्रिमंडल में स्थान मिला। विधायक परमार विद्यार्थी परिषद और संघ में लंबे समय कार्य करने के बाद वर्षों से भाजपा की स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे।

भाजपा में आकर निभाया वादा

बदनावर विधायक रहे राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव को सिंधिया कोटे से मंत्रिमंडल में जगह मिली है। बीते चुनाव में सिंधिया ने चुनावी सभाओं में मंच से कहा था कि राज्यवर्धन मंत्री होंगे, ये मेरा वादा है। सरकार बनने के बाद बनी परिस्थितियों में तमाम कोशिशों के बाद भी सिंधिया राज्यवर्धन को कांग्रेस मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करवा सके थे। सिंधिया के कांग्रेस छोड़ते ही राज्यवर्धन ने भी इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ले ली थी। अब नए मंत्रिमंडल गठन के समय सिंधिया ने राज्यवर्धन को मंत्री बनवा दिया। सिंधिया का साथ देने वाले डंग भी दूसरी बार के विधायक हैं, लेकिन उन्हें भी इस खेमे का होने से लाभ मिला।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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